उत्तर प्रदेश के बरेली कॉलेज में बुधवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया, जिसने पूरे परिसर का माहौल गर्मा दिया। कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे एक कथित टिप्पणी को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों के निशाने पर आ गए।

UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली कॉलेज में बुधवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया, जिसने पूरे परिसर का माहौल गर्मा दिया। कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे एक कथित टिप्पणी को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों के निशाने पर आ गए। आरोप है कि उनकी पोस्ट में एक महिला साध्वी के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे छात्र-छात्राओं के बीच नाराजगी तेजी से फैल गई। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नारी सम्मान, धार्मिक भावनाओं और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जुड़ा प्रश्न बन गया है। देखते ही देखते विरोध इतना तेज हो गया कि बरेली कॉलेज में नारेबाजी, प्रदर्शन और प्रशासनिक दफ्तरों के घेराव की स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि यदि प्रशासन ने तुरंत और सख्त कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पहले कॉलेज परिसर में मार्च निकाला और फिर प्राचार्य कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। इसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने चीफ प्रॉक्टोरियल कार्यालय पर ताला जड़ दिया और उसकी चाबी प्राचार्य को सौंप दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक प्रशासन ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। सूत्रों के अनुसार, बाद में कॉलेज प्रशासन की ओर से यह संकेत मिलने पर माहौल कुछ शांत हुआ कि चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाने और वैकल्पिक तौर पर इंदीवर सिंह चौहान को अग्रिम आदेशों तक जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का रुख कुछ नरम पड़ा।
दूसरी ओर, प्रो. आलोक खरे ने अपने ऊपर लगे आरोपों और पूरे विवाद को लेकर सफाई दी है। उनका कहना है कि उनका सेवानिवृत्ति समय नजदीक है और वह चार साल का कार्यकाल बिना किसी बड़े विवाद के पूरा कर चुके हैं। प्रो. खरे के मुताबिक उन्होंने 30 मार्च को ही अपना त्यागपत्र प्राचार्य को सौंप दिया था और उन्हें जल्द पदमुक्त किए जाने का आश्वासन भी मिला था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बुधवार को जब उन्हें प्राचार्य कार्यालय में घेराव की सूचना मिली और वह वहां पहुंचे, तो कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता की। उनके अनुसार, गालीगलौज, धक्का-मुक्की और हाथापाई की कोशिश की गई। प्रो. खरे ने कहा कि इससे पहले उनके कार्यालय में भी ताला डाल दिया गया था और पूरी घटना कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। उन्होंने प्रशासन से कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में बरेली कॉलेज शिक्षक संघ भी खुलकर सामने आया है। शिक्षक संघ के महासचिव प्रो. वीपी सिंह ने कहा कि यदि किसी को किसी शिक्षक या अधिकारी से शिकायत थी, तो उसके लिए संस्थागत और वैधानिक मंच मौजूद थे। लेकिन प्राचार्य कार्यालय में घुसकर चीफ प्रॉक्टर के साथ अभद्रता करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि शैक्षणिक वातावरण के लिए भी बेहद नुकसानदायक है। शिक्षक संघ ने कॉलेज प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो लोग परिसर का माहौल बिगाड़ने के जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मामले में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक मंचों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ संगठनों ने प्रो. आलोक खरे की पोस्ट को अस्वीकार्य बताते हुए कार्रवाई की मांग की, तो वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षकों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने विरोध के तौर-तरीकों पर आपत्ति जताई। महानगर अध्यक्ष सछास विक्रांत सिंह पाल ने कहा कि चीफ प्रॉक्टर के साथ की गई अभद्रता की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उनके अनुसार, यह घटना केवल एक व्यक्ति के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों की मर्यादा पर भी सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में शिक्षा के केंद्र राजनीतिक टकराव के अखाड़े नहीं बनने चाहिए। असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन विरोध का तरीका भी लोकतांत्रिक और गरिमामय होना चाहिए। UP News