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बरेली में जल जीवन मिशन के तहत निमार्णाधीन पानी की टंकी गिरने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

UP News : बरेली में जल जीवन मिशन के तहत निमार्णाधीन पानी की टंकी गिरने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निर्देश पर इस मामले में जिम्मेदार निर्माण एजेंसी और निरीक्षण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कई स्तरों पर लापरवाही सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है।
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जांच के बाद निर्माण एजेंसी एनसीसी और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी बीएलजी कंस्ट्रक्शन सर्विसेज को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब इन कंपनियों को किसी भी नए सरकारी प्रोजेक्ट में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही दोनों एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ सके।
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सरकार ने केवल ब्लैकलिस्ट करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है, बल्कि वित्तीय दंड भी लगाया गया है।
* निर्माण एजेंसी पर परियोजना की कुल लागत का 5 प्रतिशत पेनाल्टी
* संबंधित फर्म पर अतिरिक्त 1 प्रतिशत पेनाल्टी
* टंकी का पुनर्निर्माण एजेंसी को अपने खर्च पर करना होगा।
इस कदम को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
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इस घटना में लापरवाही और निगरानी में कमी पाए जाने पर कई इंजीनियरों पर भी कार्रवाई हुई है। जल निगम (ग्रामीण) की अधिशासी अभियंता कुमकुम को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा दो जूनियर इंजीनियरों को भी सस्पेंड कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। आउटसोर्सिंग पर तैनात दो सहायक अभियंताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी के बरेली में तैनात इंचार्ज को भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। यह पूरा मामला 4 मई को बरेली के आलमपुर जाफराबाद क्षेत्र में हुआ था, जहां निमार्णाधीन पानी की टंकी अचानक गिर गई थी। घटना के बाद राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में निर्माण गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां सामने आईं, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई। जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में सभी जिलों में निमार्णाधीन और पूर्ण हो चुकी जल टंकियों की गुणवत्ता की कड़ी निगरानी की जाए। साथ ही थर्ड पार्टी टेक्निकल सेफ्टी आॅडिट अनिवार्य करने पर भी जोर दिया गया है। इस कार्रवाई को सरकार की ओर से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
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