राहुल गांधी का लखनऊ दौरा आज, दलित समाज के बीच संदेश देने की तैयारी

शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सामाजिक समीकरणों की हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बहुजन आंदोलन के बड़े प्रतीक कांशीराम की जयंती से ठीक पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लखनऊ दौरा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक मौजूदगी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और वंचित तबकों के बीच कांग्रेस की नई पकड़ बनाने की कोशिश का हिस्सा है। शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है। कांग्रेस ने इस आयोजन को ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ का नाम दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इसे उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक एजेंडे के विस्तार के तौर पर पेश करना चाहती है।

उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय की जमीन पर नया संदेश देने की कोशिश

कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं तथा युवाओं के अधिकारों जैसे मुद्दों को केंद्र में रख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह पहल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर पड़े सामाजिक आधार को दोबारा खड़ा करने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय से जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मिशन-2027 के लिए कांग्रेस की शुरुआती सामाजिक तैयारी के तौर पर भी पढ़ा जा रहा है।

कांशीराम जयंती से पहले कार्यक्रम का समय भी बना सियासी संकेत

15 मार्च को कांशीराम जयंती है। उससे ठीक पहले लखनऊ में इस तरह का आयोजन होना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कांशीराम उत्तर प्रदेश सहित देशभर की बहुजन राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनकी जयंती से पहले राहुल गांधी का दलित बुद्धिजीवियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच पहुंचना कांग्रेस की सोच-समझकर बनाई गई रणनीति की ओर इशारा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि 11 मार्च को प्रस्तावित रायबरेली दौरा टलने के बावजूद लखनऊ कार्यक्रम को प्राथमिकता दी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस फिलहाल उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक और राजनीतिक हस्तक्षेप को नए सिरे से धार देने में जुटी है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने आसान नहीं है राह

हालांकि कांग्रेस की यह कोशिश जितनी महत्वपूर्ण दिख रही है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी अब भी एक मजबूत प्रतीकात्मक और भावनात्मक आधार रखती है, खासतौर पर जाटव समाज में उसकी पकड़ बनी हुई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी पिछले एक दशक में दलित समुदायों के बीच अपने संगठन और सरकारी योजनाओं के जरिए प्रभाव बढ़ाया है। यही नहीं, समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में पिछड़े और सामाजिक न्याय की राजनीति के सवाल पर लगातार सक्रिय रहती है। ऐसे में कांग्रेस के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बनाना सीधा मुकाबला नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक मेहनत का मामला होगा।

मिशन-2027 के लिए उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तैयारी भी तेज

राहुल गांधी के लखनऊ दौरे के समानांतर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की दिशा में भी सक्रिय नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव की तैयारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में 375 ‘न्याय योद्धा’ नियुक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। इनकी भूमिका केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-न्याय आधारित हस्तक्षेप की भी होगी। बताया जा रहा है कि ये न्याय योद्धा अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं पर नजर रखेंगे और उन लोगों की मदद करेंगे जो कानूनी लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं हैं। जरूरतमंदों को हर स्तर पर सहयोग देने की जिम्मेदारी इन योद्धाओं को सौंपी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधि विभाग को दी गई है। UP News

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उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों को आज मिलेगा बड़ा तोहफा

उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी राहत और आर्थिक संबल लेकर आया है। कृषि प्रधान इस राज्य के करोड़ों अन्नदाताओं को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का लाभ मिलने जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए बड़ी सौगात
उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए बड़ी सौगात
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 10:46 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के करोड़ो किसानों के लिए किसी राहत से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी राहत और आर्थिक संबल लेकर आया है। कृषि प्रधान इस राज्य के करोड़ों अन्नदाताओं को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का लाभ मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम से इस किस्त को जारी करेंगे, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में डीबीटी के जरिए सीधे 4335.11 करोड़ रुपये पहुंचेंगे। यह सिर्फ सरकारी सहायता की एक और किस्त नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भरने वाला कदम है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह रकम खेती की तैयारी, बीज, खाद और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद साबित होगी।

उत्तर प्रदेश को अब तक मिल चुके हैं 94 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगातार सबसे अहम रही है। 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों के बैंक खातों में 94,668.58 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे पहुंचाई जा चुकी है। अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह कुल आंकड़ा बढ़कर 99,003.69 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यह बताने के लिए इतना ही काफी है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना कितने बड़े स्तर पर असर डाल रही है और लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों किसान परिवार इससे सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

हर साल 6 हजार रुपये की मिलती है मदद

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवार के एक सदस्य को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े नियमित खर्चों में सहायता देना और उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत करना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2025 को कोयम्बटूर से इस योजना की पिछली किस्त जारी की थी।

उत्तर प्रदेश में वर्षवार किसानों को मिली सम्मान निधि

वर्षधनराशि
2018-192238.92 करोड़ रुपये
2019-2011006.87 करोड़ रुपये
2020-2114432.14 करोड़ रुपये
2021-2215775.52 करोड़ रुपये
2022-2312454.32 करोड़ रुपये
2023-2413808.48 करोड़ रुपये
2024-2515594.74 करोड़ रुपये
2025-26 (अप्रैल-जुलाई)5043.33 करोड़ रुपये
2025-26 (अगस्त-नवंबर)4314.26 करोड़ रुपये
2025-26 (दिसंबर-मार्च)4335.11 करोड़ रुपये



उत्तर प्रदेश के जिलों में होगा लाइव प्रसारण

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी होने के कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में व्यापक स्तर पर दिखाने की तैयारी की गई है। सोनभद्र जिले में इस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण समितियों, ब्लॉकों और पंचायत भवनों में कराया जाएगा। जिले के 1 लाख 61 हजार 265 किसानों को इस योजना का लाभ मिलने जा रहा है। जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग ने इस आयोजन को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस कार्यक्रम से जुड़ सकें और योजना की जानकारी प्राप्त कर सकें।

समितियों और पंचायत भवनों में दिखेगा वेबकास्ट

सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता की ओर से संबंधित समितियों के अधिकारियों को कार्यक्रम के प्रसारण को लेकर निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उप कृषि निदेशक वीरेन्द्र कुमार ने ब्लॉक और पंचायत स्तर पर भी आयोजन सुनिश्चित करने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, 13 मार्च को शाम 5 बजे जनपद की सभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों में पीएम इंडिया वेबकास्ट लिंक के जरिए लाइव कार्यक्रम दिखाया जाएगा। इसके लिए स्मार्ट टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्रसारण की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही जिला प्रशासन के सहयोग से अधिक से अधिक किसानों और समिति सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। UP News

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अयोध्या में धार्मिक उल्लास के बीच शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया।

अयोध्या में शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
अयोध्या में शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 09:56 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम में एक बार फिर भक्ति, वैदिक परंपरा और उत्सव का अलौकिक संगम दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किए जाने वाले श्रीराम नाम मंदिर और श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा को लेकर गुरुवार से सात दिवसीय अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गया। इस विशेष धार्मिक आयोजन का शुभारंभ प्रतीकात्मक कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसे श्रीराम मंदिर से लक्ष्मण किला तक निकाला गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया। इस क्रम में उन्होंने क्षौर कर्म के बाद मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू में स्नान कर अनुष्ठान की औपचारिक शुरुआत की।

यज्ञशाला में शुरू हुए हवन पूजन और वेदपाठ

इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित यज्ञशाला में नौ कुंडीय हवन-पूजन के लिए पंचांग पूजन, वेदी पूजन और अन्य वैदिक अनुष्ठान आरंभ हुए। साथ ही चतुर्वेदों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पारायण भी शुरू हो गया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धा और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती के मार्गदर्शन में प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही अयोध्या लाया गया था। तब से मंदिर परिसर में इसकी पूजा हो रही है। अब मंदिर के दूसरे तल पर इसकी विधिवत प्रतिष्ठा के लिए सात दिनों का यह अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।

19 मार्च को राष्ट्रपति की मौजूदगी में पूर्णाहुति

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, 18 मार्च को चैत्र कृष्ण अमावस्या के अवसर पर दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी। इसके बाद 19 मार्च को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पूजन में शामिल होंगी और उसी दिन इस सात दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी अत्यंत अहम माना जा रहा है। राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक बड़े कार्यक्रम की तरह इस आयोजन पर भी देशभर की निगाहें टिकी हैं।

51 आचार्य संभाल रहे अनुष्ठान की कमान

इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का संचालन मुख्य आचार्य चंद्रभानु शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके साथ आचार्य इंद्रदेव मिश्र, आचार्य रवीन्द्र पैठाढ़े समेत कुल 51 आचार्यों की टोली वैदिक विधि-विधान संपन्न करा रही है। बताया गया है कि अनुष्ठान प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय चलेगा। डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस समारोह में लगभग 300 संस्थाओं और एजेंसियों से जुड़े 1800 लोगों को आमंत्रित किया गया है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से हजारों मेहमान होंगे शामिल

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से करीब साढ़े तीन हजार अतिथियों को आमंत्रण दिया गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए चले समर्पण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा सात राज्यों से लगभग 300 संतों को भी आमंत्रित किया गया है। उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था अयोध्या में सात अलग-अलग स्थानों पर की गई है। उत्तर प्रदेश प्रशासन और मंदिर प्रबंधन इस आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में जुटा हुआ है।

मां अमृतानंदमयी 1200 अनुयायियों के साथ पहुंचेंगी अयोध्या

डॉ. अनिल मिश्र ने जानकारी दी कि केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मां अमृतानंदमयी भी इस अनुष्ठान में शामिल होने अयोध्या आएंगी। वह अपने करीब 1200 भक्तों के साथ 15 मार्च को रवाना होंगी और 17 मार्च को अयोध्या पहुंचेंगी। उनका प्रवास 20 मार्च तक प्रस्तावित है। मां अमृतानंदमयी की मौजूदगी से इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश की आस्था नगरी अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन और तेज होने की संभावना है।

वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर निकलेगी रामकोट परिक्रमा

इसी बीच, विक्रमादित्य महोत्सव समिति के तत्वावधान में 18 मार्च को वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर रामकोट परिक्रमा का आयोजन भी किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मंदिरों में ध्वज-पताका फहराने तथा वंदनवार सजाने का आग्रह भी किया। इस अपील के जरिए हिंदी नववर्ष को लेकर उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का व्यापक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

21 साल पुराने संकल्प से जुड़ी है परिक्रमा की परंपरा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि रामकोट परिक्रमा की शुरुआत 21 वर्ष पहले राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ हुई थी। संकल्प पूर्ण होने के बाद इस परंपरा को जारी रखा गया, ताकि नई पीढ़ी भी इसके महत्व को समझे और इससे जुड़ाव महसूस करे। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि संतों के संकल्प की सिद्धि के बाद इस परिक्रमा का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में इस आयोजन को पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन की परिक्रमा का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन वर्ष में एक बार होने वाली यह विशेष परिक्रमा आस्था को और दृढ़ करती है। वहीं लक्ष्मण किला के महंत मैथिली रमण शरण ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजी नववर्ष को उत्साह से मनाया जाता है, उसी तरह हिंदी नववर्ष पर भी सनातन परंपरा से जुड़े लोगों को उत्सवधर्मी भाव से आगे आना चाहिए।

रामजन्मभूमि संरक्षण के संकल्प से भी जुड़ी रही परिक्रमा

बावन मंदिर के महंत वैदेही वल्लभ शरण ने बताया कि 21 वर्ष पहले जब इस परिक्रमा की शुरुआत की गई थी, तब इसके पीछे कई महत्वपूर्ण संकल्प जुड़े थे। इनमें श्रीराम जन्मभूमि के संरक्षण का उद्देश्य भी प्रमुख था। कार्यक्रम का संचालन महंत रामशरण दास रामायणी ने किया। इस दौरान सीताकांत सदन के महंत रामानुज शरण, आचार्य राकेश तिवारी, जानकी कुंज के महंत वीरेंद्र दास, महंत छवि राम दास, महंत सत्येंद्र दास शास्त्री, डॉ. चंद्रगोपाल पाण्डेय और अवनि कुमार शुक्ल सहित कई संत और धर्माचार्य मौजूद रहे। UP News

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