पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के सहयोगी भवानी भीख शुक्ला ने अपने पांच बेटों के साथ लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। उन्होंने कटरा विधायक के साथ विवाद को पार्टी छोड़ने की वजह बताया। पढ़े पूरी खबर

UP News:उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोंडा क्षेत्र से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के लंबे समय के सहयोगी भवानी भीख शुक्ला ने अपने पांच बेटों के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। यह राजनीतिक बदलाव लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में हुआ, जहां अखिलेश यादव ने इस परिवार का स्वागत किया। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला पंचायत सदस्य और कटरा बाजार ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि भवानी भीख शुक्ला और उनके पांच बेटों—भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया। यह घटनाक्रम आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। UP News
भवानी भीख शुक्ला ने भाजपा छोड़ने का मुख्य कारण कटरा विधायक बवन सिंह के साथ चल रहा विवाद बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार को परेशान किया गया और एक पिछले हमले की घटना पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की गई। शुक्ला ने खुद को सत्ताधारी दल से 'बाहर निकाले जाने' की बात कही है। UP News
शुक्ला का राजनीतिक करियर 1999 में भाजपा के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद वे 2009 से 2012 तक बसपा, 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और फिर 2017 में दोबारा भाजपा में शामिल हुए थे। उनकी पत्नी जुगरानी वर्तमान में कटरा बाजार की ब्लॉक प्रमुख हैं। बताया गया है कि शुक्ला अब 2027 के विधानसभा चुनाव में कटरा बाजार निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। UP News
इस अवसर पर अखिलेश यादव ने पांचों बेटों के नामों का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार पार्टी कार्यालय में इतने सारे 'देवताओं' का एक साथ आगमन हुआ है। इस कार्यक्रम के दौरान भाजपा, बसपा और कांग्रेस के कई अन्य राजनीतिक चेहरे भी पार्टी में शामिल हुए, जिनमें पूर्व भाजपा विधायक राजीव चन्ना भी शामिल थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गोंडा क्षेत्र में भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण झटका है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि इस बदलाव का स्थानीय जनाधार पर क्या असर पड़ता है। UP News
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