उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, किसानों को सीधा लाभ
Uttar Pradesh Samachar
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 03:48 AM
उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह बड़ा फैसला तुरंत लागू किया जा रहा है। यह बड़ा फैसला लागू होते ही उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं इस फैसले के कारण उत्तर प्रदेश सरकार का बहुत सारा समय तथा सरकारी धन भी बचेगा। उत्तर प्रदेश सरकार जो नई व्यवस्था लागू करेगी उस व्यवस्था को प्रदेश के किसानों के लिए क्रांतिकारी व्यवस्था बताया जा रहा है। Uttar Pradesh Samachar :
फटाफट हो जाएगा उत्तर प्रदेश के किसानों का बड़ा काम
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए चकबंदी एक बड़ा काम होता है। चकबंदी की प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने में अनेक साल तक लग जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी की पुरानी प्रक्रिया को बदलकर नई प्रक्रिया तय कर दी है। उत्तर प्रदेश के अधिकारियों का दावा है कि चकबंदी की नई प्रक्रिया से किसानों का अनेक वर्षों में होने वाला चकबंदी जैसा महत्वपूर्ण काम फटाफट हो जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तय की गई चकबंदी की नई प्रक्रिया को समझने से पहले आपको चकबंदी का पूरा अर्थ तथा कारण बता देते हैं।
क्या होती है चकबंदी
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए चकबंदी बहुत महत्चपूर्ण होती है। चकबंदी को संक्षिप्त रूप में इस प्रकार समझ सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार के बढऩे के साथ ही खेती की जमीनों में बँटवारा होता रहता है। ऐसे में एक समय के बाद पैतृक खेत, बाग जैसी ज़मीने छोटे-छोटे टुकड़ों में बँटी रहती हैं। इसके कारण किसानों को छोटे जमीन के टुकड़ों पर खेती करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, लम्बे समय के बाद गाँवों में खेत की सीमाओं संबंधी विवाद, सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण आदि की शिकायतें बढ़ जाती हैं, जिसके कारण सरकार चकबंदी कराती है। उत्तर प्रदेश में चकबंदी योजना की शुरुआत साल 1954 में मुजफ्फरनगर जिले की कैराना तहसील और सुल्तानपुर जिले की मुसाफिर खाना तहसील से हुई थी। सफल परीक्षण के बाद चकबंदी योजना को साल 1958 से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया गया। जोत चकबन्दी अधिनियम की धारा 4(1), 4(2) के तहत गाँवों में चकबंदी कराने के लिए राज्य सरकार विज्ञापन जारी कराती है। इसके बाद चकबंदी आयुक्त द्वारा धारा 4क (1), 4क (2) के तहत चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने की अधिसूचना जारी करते हैं । गाँवों में चकबंदी की अधिसूचना जारी होने के बाद उस ग्राम के राजस्व न्यायालय मुकदमें अप्रभावी हो जाते हैं। इस दौरान चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी खातेदार (किसान) अपनी जमीन का इस्तेमाल खेती से जुड़े काम के अलावा नहीं कर सकता है। चकबंदी अधिसूचना ज़ारी होने के बाद ग्राम में चकबंदी समिति का गठन भूमि प्रबंधन समिति के सदस्यों में से किया जाता है, जिसका अध्यक्ष ग्राम प्रधान होता है। यह समिति चकबंदी प्रक्रिया के प्रत्येक स्तर पर चकबंदी अधिकारियों को सहयोग और परामर्श देती हैं। इसी प्रकार एक लम्बी प्रक्रिया है जिसके द्वारा चकबंदी पूरी होने में अनेक साल का समय लग जाता है।
उत्तर प्रदेश में ऑन लाइन की जाएगी चकबंदी
उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसले करते हुए चकबंदी की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में चकबंदी के लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया गया है। इसके माध्यम से सभी जिलों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होगी। चक (गाटाओं) के बंटवारे से लेकर अन्य अभिलेख तक इससे अपलोड होंगे। अभी तक जिस कार्य को पूरा करने में वर्षों बीत जाते हैं, वह इस पोर्टल से दो-दो दिन में पूरा हो सकेंगे। रिकॉर्ड के हेरफेर पर भी अंकुश लगेगा। जिले में फिलहाल चार गांव में चकबंदी संचालित हैं। इसमें सबसे बड़ा गांव साथिनी है। अब जल्द ही उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन ही चकबंदी शुरू कर दी जाएगी। एआइ व ड्रोन का भी प्रयोग होगा। इससे दस्तावेजों का विवरण एकत्र कर भूमि के आंकड़ों का संकलन करने में भी सक्षम होगा। खसरा, खतौनी व भूमि के नक्शे को चकबंदी के जीआइएस पोर्टल पर अपलोड करने में भी मदद मिलेगी। समय की भी बचत होगी। सभी काम आनलाइन होंगे। Uttar Pradesh Samachar