Uttar Pradesh News गाजियाबाद या आसपास के उन वाहन मालिकों के लिए बड़ी खबर है वह सावधान हो जाएं। अगर उनकी गाड़ी 10 या 15 साल पुरानी हो चुकी है वह डीजल या पेट्रोल की है अब वह उन्हें सड़कों पर नहीं दौड़ा सकेंगे। आरटीओ विभाग द्वारा उनको एनओसी नहीं दी जाएगी। गाजियाबाद विभाग द्वारा 462,000 वाहनों को स्क्रैप पॉलिसी के अंतर्गत ला दिया है। यानी जिले के 462000 वाहन अब बन जाएंगे कबाड़। आरटीओ अधिकारी राहुल श्रीवास्तव ने साफ तौर पर कहा है कि अब पुराने सीमा पार कर चुके वहां जिले में और बाहर कहीं नहीं चल सकेंगे, क्योंकि अब दस से पंद्रह पुराने डीजल पेट्रोल वालों को एनओसी जारी नहीं किया जाएगा।
कबाड़ घोषित होंगे पुराने वाहन
यानी वह पुराने वाहन सड़कों पर चलाने के योग्य नहीं अब वह स्कैप यानी कबाड़ घोषित होंगे। और इसके लिए उन्हें बाकायदा विभाग से सर्टिफिकेट लेना होगा। इस सर्टिफिकेट से नए वाहन खरीदने में वाहन मालिकों को मदद मिलेगी। पुराने वाहनों को लोग किसी और प्रदेश या जिलों में लेकर चला लेते थे लेकिन अब निक न मिलने के वजह से वह दूसरी जगह अभी पुराने वाहनों को नहीं चला सकेंगे।
पुराने वाहन मालिकों को स्क्रैप केंदों से प्रमाण पत्र लेना होगा
गाजियाबाद जिले में आरटीओ द्वारा, दो लाख 72000 10 से 15 साल की सीमा पार कर चुके हैं और दूसरी तरफ गाजियाबाद आरटीओ विभाग में 190000 वाहनों को निष्प्रयोजित श्रेणी में रख दिया है। यानी अब कुल मिलकर 4 लाख 62000 पुराने वाहन स्क्रैप (कबाड़) में जाएंगे। इन वनों में ऑटो वगैरा भी शामिल है।
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प्रशासन के सामने स्क्रैप वाहनों की रखने की जगह को लेकर किल्लत
उल्लेखनीय है नीतियां बनाना आसान है लेकिन उन्हें लागू करना बहुत कठिन होता है इस ली में कई तरह की दिक्कत भी आ रही है वन मालिकों को एक तरफ स्क्रैप पॉलिसी में प्रमाण पत्र जारी करने की योजना की गई है। जिसमें उन्हें नए वहां पर लाभ भी मिलेगा लेकिन वाहन मालिक अधिकृत सेंट्रो पर स्क्रैप में अपने पुराने वाहन नहीं बेचना पसंद कर रहे क्योंकि उन्हें फुटकर विक्रेताओं के पास इससे अधिक अच्छी धनराशि मिल जाती है। दूसरी तरफ प्रशासन के पास स्क्रैप पॉलिसी में आए वाहनों को रखने के लिए जगह की किल्लत है। उल्लेखनीय है बुलंदशहर के इलाके में निष्प्रयोजित वाहनों के लिए जगह चिन्हित की गई थी लेकिन स्थानीय लोगों के कोर्ट में जाने पर वहां मामला अटक गया था। इसके बाद नूर सिंघानी गेट पर भी इन वनों को रखने के लिए जगह चिन्हित कई गई लेकिन यहां भी पुलिस कमिश्नर रेंट बनने से मामला खटाई में पड़ गया। ऐसे में प्रशासन के सामने भी काफी बेबसी है। गाजियाबाद में अभी तक 462000 में से 89 हजार वहां ही स्क्रैप पॉलिसी के अंतर्गत आप आए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से गाजियाबाद के मोरटी गांव में सरल अप ऑटो को अधिकृत किया गया है लेकिन वहां भी मात्र 350 वहां ही स्क्रैप में आए हैं। इसका कारण बताया जा रहा है की अधिकृत सेंट्रो पर इतनी कीमत इस स्टेप में नहीं मिल रही जितनी उन्हें बाहर बाजार में मिल जाती है।
प्रस्तुति मीना कौशिक
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