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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में संभावित विस्तार और भाजपा के प्रदेश संगठन में नई जिम्मेदारियों को लेकर पार्टी के भीतर गहन विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश से जुड़े अहम राजनीतिक फैसलों पर शीर्ष नेतृत्व जल्द मुहर लगा सकता है।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक बार फिर हलचल बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में संभावित विस्तार और भाजपा के प्रदेश संगठन में नई जिम्मेदारियों को लेकर पार्टी के भीतर गहन विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश से जुड़े अहम राजनीतिक फैसलों पर शीर्ष नेतृत्व जल्द मुहर लगा सकता है। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश भाजपा की गतिविधियां तेज हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी राजधानी में लगातार बैठकों में शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इन मुलाकातों में उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार, संगठनात्मक फेरबदल और विभिन्न आयोगों, निगमों व बोर्डों में नियुक्तियों जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई है। UP News
शनिवार शाम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने संसद भवन स्थित कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर जल्द कुछ बड़े फैसले सामने आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम के गठन और योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में लगातार रणनीति बनाई जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह पिछले दो दिनों से राजधानी में सक्रिय हैं। गुरुवार देर रात भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई लंबी बैठक को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों की चुनौतियों को देखते हुए पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल, सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में कुछ पद खाली हैं, जिन पर नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में संभावित विस्तार के जरिए सरकार न केवल प्रशासनिक मजबूती का संदेश देगी, बल्कि राजनीतिक रूप से भी नए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही प्रदेश संगठन की नई टीम के गठन की कवायद भी आगे बढ़ रही है। इसके बाद आयोगों, निगमों और बोर्डों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भी नियुक्तियों का रास्ता साफ हो सकता है। पार्टी के भीतर यह भावना है कि उत्तर प्रदेश में इन पदों को भरने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है, इसलिए अब निर्णयों में तेजी लाई जा सकती है। UP News
हाल में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े ने लखनऊ का दौरा कर पार्टी के बड़े नेताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। इन बैठकों में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की सक्रियता और सामाजिक आधार को लेकर फीडबैक लिया गया। बताया जा रहा है कि उसी रिपोर्ट के आधार पर अब दिल्ली में आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए यह आकलन किया गया है कि सरकार और संगठन दोनों में कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं, ताकि क्षेत्रीय और सामाजिक दोनों स्तरों पर संतुलन मजबूत हो। UP News
भाजपा के भीतर चल रहे मंथन में सबसे ज्यादा जोर उत्तर प्रदेश के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर बताया जा रहा है। पार्टी के कई नेताओं ने सुझाव दिया है कि विस्तार और नियुक्तियों के दौरान उन वर्गों को प्राथमिकता दी जाए, जहां हाल के समय में असंतोष या दूरी की चर्चा रही है। अवध क्षेत्र समेत उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पासी, कुर्मी और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई है। साथ ही ब्राह्मण समाज की नाराजगी जैसे मुद्दों को भी नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है। पार्टी के भीतर यह राय उभरकर आई है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जटिल सामाजिक ताने-बाने वाले राज्य में केवल एक वर्ग पर फोकस करके राजनीतिक संतुलन कायम नहीं रखा जा सकता। UP News
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह भी चर्चा हुई है कि उत्तर प्रदेश में 2014 के लोकसभा चुनावों के समय जो व्यापक सामाजिक समर्थन भाजपा को मिला था, वैसा संतुलन दोबारा तैयार करने की जरूरत है। कई नेताओं ने फीडबैक दिया है कि कुछ जातीय समूहों में बिखराव के संकेत मिले हैं, जिन्हें समय रहते साधना जरूरी है। इसीलिए मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन में फेरबदल और आयोग-निगमों में नियुक्तियों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। UP News
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