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UP News: 2022 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई; उसका वोट शेयर गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 2.33% पर पहुंच गया।

UP News: बिहार विधानसभा चुनाव के बुरे अनुभव के बाद कांग्रेस अब यूपी में कोई गलती नहीं करना चाहती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं, लेकिन कांग्रेस ने उन सीटों की पहचान करना शुरू कर दिया है जिन पर वह चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। पार्टी सचिवों को उन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची जमा करने का काम मिला है, जिनकी मांग पार्टी अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट-बंटवारे की बातचीत के दौरान कर सकती है।
कांग्रेस नेतृत्व सपा के साथ बातचीत में आने वाली संभावित जटिलताओं को लेकर विशेष रूप से सतर्क है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में सीट-बंटवारे की बातचीत में हुई देरी और 'INDIA' गठबंधन के सहयोगियों के बीच "आपसी लड़ाइयों" (friendly fights) के कारण उसे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
दो सूचियां बनाई जा रही है
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उत्तर प्रदेश के प्रभारी एआईसीसी महासचिव अविनाश पांडे ने राज्य के छह पार्टी सचिवों से दो सूचियां तैयार करने को कहा है। एक सूत्र ने बताया, "पहली सूची में सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवार शामिल होंगे, जबकि दूसरी सूची में लगभग 100-120 ऐसी सीटों की पहचान की जाएगी, जहां जीत की संभावनाएं अधिक हैं।"
पार्टी ने अंदरूनी तौर पर उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को तीन कैटेगरी में बांटा है: ज़्यादा संभावना वाली, औसत और कमज़ोर। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने कहा, "अब तक हमने पहली कैटेगरी में 100 से ज़्यादा सीटें, दूसरी में करीब 200 और तीसरी में लगभग 120 सीटों की पहचान की है।" UP News
इस प्रक्रिया में शामिल AICC के एक सचिव ने बताया कि स्थानीय इकाइयों और चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों से फीडबैक लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम निर्वाचन क्षेत्रों का आकलन कर रहे हैं और चुनाव लड़ने में रुचि रखने वाले नेताओं से बात कर रहे हैं। हममें से ज़्यादातर उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में प्रभारी को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।"
80 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस का लक्ष्य सपा के साथ गठबंधन के तहत करीब 80 सीटों पर चुनाव लड़ना है। एक सूत्र ने कहा, "हम करीब 100-120 ऐसी सीटों की पहचान करेंगे, जहां हमें लगता है कि हम मुकाबले में हैं, आखिर में करीब 80 सीटों पर सहमति बनेगी। हम ऐसी सीटें भी नहीं चाहते जहां सामाजिक समीकरण हमारे पक्ष में न हों। हमारा ध्यान उन सीटों पर है जहां जीत की संभावना ज्यादा हो।"
पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इस प्रक्रिया में राज्य-स्तर के पदाधिकारियों का दखल बहुत ज्यादा न हो। दिल्ली में रहने वाले उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "एक संतुलन होना ज़रूरी है। यूपी इकाई में कोई भी गठबंधन नहीं चाहता, क्योंकि इससे सीटों की संख्या और स्थानीय नेताओं का प्रभाव, दोनों ही कम हो जाते हैं। यह भावना 2022 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिली थी, जब नेतृत्व को अकेले चुनाव लड़ने के लिए राजी किया गया था। हम सबने उसका नतीजा देखा ही है।" UP News
2022 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई; उसका वोट शेयर गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 2.33% पर पहुंच गया।
राहुल गांधी में गठबंधन के पक्ष में
रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी भी सपा के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं लेकिन पार्टी का एक धड़ा ऐसा भी है जो अलग चुनाव लड़ने का विक्लप भी खुला रखना चाहता है।
गांधी के करीबी माने जाने वाले एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ हमारा गठबंधन बहुत अच्छा रहा। इसी गठबंधन की वजह से बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर 240 सीटों पर सिमट गई और बहुमत के आंकड़े से नीचे आ गई। अब हम इस व्यवस्था को क्यों बिगाड़ें?”
2024 के लोकसभा चुनावों में, सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में क्रमशः 63 और 17 सीटों पर चुनाव लड़ा। कुल मिलाकर, इस गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं। सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह।
कांग्रेस को उम्मीद है कि वह अगस्त या सितंबर तक एसपी के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत पूरी कर लेगी, ताकि उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार शुरू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। हालांकि, पार्टी नेता मानते हैं कि यह बातचीत आसान नहीं होगी। UP News
मुसलमानों, दलितों, ब्राह्मणों पर रहेगा फोकस
पार्टी की रणनीति से परिचित नेताओं ने बताया कि कांग्रेस का इरादा विधानसभा चुनावों से पहले मुसलमानों, दलितों और ब्राह्मणों पर ध्यान केंद्रित करने का है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "ब्राह्मणों तक पहुंच बनाने की यह कोशिश, योगी सरकार की ओर से कथित तौर पर ठाकुर समुदाय को दी जा रही तरजीह की वजह इस समुदाय में पनप रही नाराज़गी से जुड़ी है। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण पारंपरिक रूप से कांग्रेस के वोटर रहे हैं, लेकिन हिंदुत्व की राजनीति के चलते वे BJP की ओर मुड़ गए।"
उत्तर प्रदेश कांग्रेस इकाई में नेतृत्व में फेरबदल को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है। लखनऊ और दिल्ली, दोनों जगहों पर इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि चुनावों से पहले राज्य के नेतृत्व में कुछ बदलाव हो सकते हैं। जहां पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, वहीं राज्य के कार्यकर्ता और नेता स्थिति स्पष्ट होने का इंतज़ार कर रहे हैं। UP News
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