रायबरेली में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने तथा पुराने ऑफलाइन प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।

UP News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने तथा पुराने प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक जटिल हो गई है। शासन की ओर से 1 अक्टूबर से लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश और सत्यापन के बाद ही प्रमाणपत्र जारी हो सकेगा। वहीं, एक से दो वर्ष पुराने मामलों में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। शासन के नए निर्देशों के अनुसार जन्म और मृत्यु के मामलों के पंजीकरण के लिए घटना के समय के आधार पर अलग-अलग प्रक्रिया निर्धारित की गई है। दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश और सत्यापन के बाद ही पंजीकरण कराया जा सकेगा। वहीं, एक से दो वर्ष के भीतर के मामलों में एसडीएम की अनुमति जरूरी होगी। नए प्रावधानों का असर उन लोगों पर भी पड़ेगा, जिनके पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बने हैं और अब उन्हें ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया पूरी करनी है।
नियमों के मुताबिक जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर दिए जाने पर पंजीकरण नि:शुल्क किया जाता है। अस्पताल में जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित अस्पताल या संस्थान की ओर से इसकी सूचना दर्ज कराई जाती है। वहीं, 21 दिन की निर्धारित अवधि के बाद पंजीकरण कराने पर विलंब शुल्क और निर्धारित दस्तावेजों की जरूरत होती है। 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने की स्थिति में शपथपत्र और देरी का कारण भी प्रस्तुत करना होता है।
रायबरेली की सदर, डलमऊ, लालगंज, महराजगंज, ऊंचाहार और सलोन तहसीलों में पुराने ऑफलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं। तहसील स्तर पर ऐसे लंबित मामलों की संख्या 20 हजार से अधिक बताई जा रही है।
अब पुराने मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जुड़ने के कारण आवेदकों को वकीलों की मदद लेने और अतिरिक्त कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की जरूरत पड़ रही है। इससे लोगों का समय और खर्च दोनों बढ़ने की बात सामने आ रही है।
एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ ने बताया कि शासनादेश के अनुसार दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाणपत्र बनाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि दो साल से पहले ऑफलाइन जारी किए गए जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने के लिए भी इसी प्रक्रिया का पालन करना होगा। ऐसे में पुराने प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने वाले आवेदकों को नए नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। UP News:
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