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बिस्मिल अज़ीमाबादी (1901–1978) पटना, बिहार के एक प्रसिद्ध उर्दू शायर थे, जिनकी लेखनी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा और जोश प्रदान किया। वर्ष 1921 में उन्होंने देशभक्ति से ओतप्रोत अमर कविता सरफरोशी की तमन्ना की रचना की, जो आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन का प्रेरणास्रोत बन गई।

Bismil Azimabadi : बिस्मिल अज़ीमाबादी (1901–1978) पटना, बिहार के एक प्रसिद्ध उर्दू शायर थे, जिनकी लेखनी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा और जोश प्रदान किया। वर्ष 1921 में उन्होंने देशभक्ति से ओतप्रोत अमर कविता सरफरोशी की तमन्ना की रचना की, जो आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन का प्रेरणास्रोत बन गई। यह वही कालखंड था जब यह कविता क्रांतिकारियों के दिलों में आज़ादी की ज्वाला को और प्रखर कर रही थी। बाद में महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ अदालत में मुकदमे के दौरान इस गीत को सामूहिक रूप से गाकर इसे ऐतिहासिक पहचान दिलाई। Bismil Azimabadi
बिस्मिल अज़ीमाबादी ने इस रचना को केवल एक कविता के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के युवा सेनानियों के लिए एक प्रेरणात्मक संदेश और आंदोलन गीत के रूप में लिखा था। शहीद भगत सिंह और चन्द्रशेखर आज़ाद जैसी महान विभूतियों के संघर्ष के दौर में यह कविता क्रांतिकारी चेतना की आवाज बनकर गूंजती रही। इसका प्रथम प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका “सबाह” में हुआ था, जिसके बाद यह कविता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अमर हो गई और आज भी देशभक्ति की भावना का प्रतीक मानी जाती है। Bismil Azimabadi
1 - न अपने ज़ब्त को रुस्वा करो सता के मुझे
ख़ुदा के वास्ते देखो न मुस्कुरा के मुझे

2 - सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

3 - मजबूरियों को अपनी कहें क्या किसी से हम
लाए गए हैं, आए नहीं हैं ख़ुशी से हम

4 - सौदा वो क्या करेगा ख़रीदार देख कर
घबरा गया जो गर्मी-ए-बाज़ार देख कर

5 - कहाँ क़रार है कहने को दिल क़रार में है
जो थी ख़िज़ाँ में वही कैफ़ियत बहार में है

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