भारत अपनी भौगोलिक विविधताओं के लिए जाना जाता है। कहीं बर्फ से ढके पहाड़ हैं तो कहीं तपते रेगिस्तान, कहीं घने जंगल तो कहीं उपजाऊ मैदान। इसी विविधता के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर भी अलग दिखाई देता है।

UP News : इन दिनों उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में शीतलहर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बफीर्ली हवाएं शरीर को झकझोर रही हैं। घरों में नल खोलते ही पानी इतना ठंडा निकलता है कि हाथ लगाना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थान ऐसे भी हैं, जहां सर्दियों के चरम में भी जमीन से प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है। भारत अपनी भौगोलिक विविधताओं के लिए जाना जाता है। कहीं बर्फ से ढके पहाड़ हैं तो कहीं तपते रेगिस्तान, कहीं घने जंगल तो कहीं उपजाऊ मैदान। इसी विविधता के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर भी अलग दिखाई देता है। एक ओर पहाड़ी इलाकों में हिमपात हो रहा होता है, तो दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहता है।
उत्तर प्रदेश में इन दिनों ठंड का प्रकोप इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हो रही बर्फबारी से सर्द हवाएं मैदानी क्षेत्रों की ओर आ रही हैं। इटावा, कानपुर और आसपास के जिलों में तापमान कई बार पहाड़ी पर्यटन स्थलों से भी नीचे दर्ज किया गया है। इस भीषण ठंड के बावजूद राज्य में कुछ ऐसे इलाके मौजूद हैं, जहां जमीन के भीतर से निकलने वाला पानी गर्म रहता है। रामपुर जिले के रेवाड़ी कलां गांव इसका प्रमुख उदाहरण है। यहां सरकारी नलों से सालभर गुनगुना से गर्म पानी निकलता है, जिससे ग्रामीणों को सर्दियों में नहाने या घरेलू उपयोग के लिए अलग से पानी गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ती।
इसी तरह मेरठ जिले के गंगानगर क्षेत्र में करीब 778 फीट गहराई तक की गई बोरिंग से प्राकृतिक गर्म पानी प्राप्त होता है। यह पानी न सिर्फ गर्म होता है, बल्कि इसमें मौजूद खनिज तत्वों के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी माना जाता है। इसमें सल्फर, कैल्शियम और अन्य खनिज घुले होते हैं, जो त्वचा और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में सहायक बताए जाते हैं। भूवैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों के अनुसार, इस घटना के पीछे कोई चमत्कार नहीं बल्कि पृथ्वी के भीतर मौजूद प्राकृतिक ऊष्मा जिम्मेदार है। धरती की गहराई में गर्म चट्टानें और मैग्मा होते हैं, जिनके संपर्क में आने से भूजल गर्म हो जाता है। जब यही पानी नलकूप, बोरिंग या प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से बाहर आता है, तो वह गर्म रूप में दिखाई देता है।
ऐसे गर्म जल स्रोत केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। उत्तराखंड के यमुनोत्री में स्थित सूर्यकुंड, हिमाचल प्रदेश के मणिकरण और बिहार के ब्रह्मकुंड जैसे स्थानों पर भी प्राकृतिक रूप से गर्म और औषधीय गुणों से भरपूर पानी निकलता है। मणिकरण तो धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल है, जहां गर्म सल्फर युक्त जलधाराएं बहती हैं। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के ये गर्म पानी के स्रोत प्रकृति और विज्ञान के अद्भुत मेल का उदाहरण हैं, जो यह साबित करते हैं कि कई बार असाधारण लगने वाली घटनाओं के पीछे गहरा वैज्ञानिक आधार छिपा होता है।