गाजियाबाद के रमतेराम रोड विवाद में भाजपा MLC श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और व्यापारी पक्ष की दो FIR, गिरफ्तारी, विरोध और 2022 के समझौते की पूरी कहानी जानें।

गाजियाबाद/लखनऊ। (चेतना मंच)। भाजपा के मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा को भाजपा द्वारा दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद वर्ष 2021 का गाजियाबाद का वह चर्चित मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और व्यापारी नेता सुभाष छाबड़ा के परिवार के बीच रमतेराम रोड पर बड़ा विवाद हुआ था।
गाजियाबाद के रमतेराम रोड पर वर्ष 2021में श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और व्यापारी नेता सुभाष छाबड़ा के परिवार के बीच बड़ा झगड़ा हुआ था, जिसमें मारपीट तक की नौबत आ गई। यही नहीं यह कहानी सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रही, बल्कि घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे के ऊपर अलग-अलग मुकदमे भी दर्ज कराए। बीजेपी के एमएलसी श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा की शिकायत पर व्यापारी नेता राजू छाबड़ा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद व्यापारी संगठनों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि कार्रवाई एकतरफा की गई। दूसरी ओर एमएलसी पक्ष की शिकायत में दूसरे पक्ष पर मारपीट, कार तोड़ने और लाखों रुपये तथा सोने की चेन लूटने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब अप्रैल 2022 में ये खबर सामने आई कि दोनों पक्षों के बीच वरिष्ठ लोगों की मौजूदगी में समझौता हो गया। लेकिन अब जब बीजेपी की तरफ से मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाने की घोषणा की गई है तो एक बार फिर गाजियाबाद कांड से जुड़ा यह मामला सुर्खियों में छा गया है।
5 दिसंबर 2021 की शाम गाजियाबाद के रमतेराम रोड पर सड़क पर कार खड़ी होने को लेकर श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और व्यापारी नेता सुभाष छाबड़ा के परिवार के बीच विवाद शुरू हुआ था। इस मामले में व्यापारी पक्ष का आरोप था कि रास्ता बाधित होने की वजह से जब अविनाश शर्मा से कार हटाने को कहा गया तब विवाद बढ़ा और मारपीट हुई। दूसरी ओर एमएलसी श्रीचंद के बेटे अविनाश शर्मा ने आरोप लगाया गया कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी कार को क्षतिग्रस्त कर दिया। यानी शुरुआत से ही यह मामला दो परस्पर विरोधी दावों वाला था।
जानकारी के अनुसार अविनाश शर्मा ने 6 दिसंबर 2021 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें यह आरोप था कि 5 दिसंबर की शाम लगभग साढ़े चार बजे वह स्कॉर्पियो से रमतेराम रोड से जा रहे थे। इसी दौरान राजू छाबड़ा उनके पास आए और मारपीट शुरू कर दी। अविनाश शर्मा की शिकायत के अनुसार जब उन्होंने घटना की वीडियो बनाने का प्रयास किया तो सुभाष छाबड़ा और कुछ अन्य लोग वहां पहुंचे और उन पर हमला किया। अविनाश शर्मा की शिकायत में यह भी आरोप था कि हमले में उनके दो दोस्त घायल हुए और उनकी कार में रखे 5 लाख रुपये तथा सोने की चेन लूट ली गई। अविनाश शर्मा की शिकायत के बाद इस मामले में राजू छाबड़ा को गिरफ्तार भी किया गया।
यह मामला यहीं पर समाप्त नहीं हुआ। व्यापारी पक्ष की ओर से भी नगर कोतवाली में श्री चंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। जानकारी के अनुसार व्यापारी पक्ष की तरफ से एक महिला ने शिकायत में आरोप लगाया कि उनकी भतीजी अपने पति और भाई के साथ सुभाष छाबड़ा के यहां जा रही थी। इसी दौरान काली स्कॉर्पियो से आए लोगों से विवाद हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्कॉर्पियो सवार लोगों ने महिला की कनपटी पर रिवॉल्वर लगाई, उसकी अंगूठी लूट ली और उसके पति के साथ मारपीट की। महिला के साथ अश्लीलता किए जाने का आरोप भी लगाया गया। इस शिकायत के बाद एमएलसी श्रीचंद शर्मा के पक्ष पर भी लूट और छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज हुआ, और FIR में एमएलसी श्रीचंद के बेटे अविनाश शर्मा की कार का नंबर भी दर्ज किया गया था।
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसे केवल “एमएलसी के बेटे के साथ मारपीट” अथवा केवल “व्यापारी पक्ष पर हमला” कहकर समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस मामले में MLC के बेटे और व्यापारी पक्ष, दोनों के ही तरफ से FIR दर्ज कराई गई, साथ ही दोनों तरफ से ही एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए। बाद में इस मामले में MLC श्री चंद्र शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने राजू छाबड़ा को गिरफ्तार किया।
मार्च 2022 में इस मामले में राजू छाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद मामला बहुत गर्म हो गया। जब पुलिस ने MLC श्री चंद्र शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा की शिकायत पर राजू छाबड़ा को गिरफ्तार किया तो इसके विरोध में उनके परिजनों तथा व्यापारियों ने थाने में हंगामा किया। हालांकि पुलिस का कहना था कि जांच में आरोप साबित होने के बाद राजू छाबड़ा की गिरफ्तारी की गई। लेकिन अप्रैल 2022 में व्यापारी संगठनों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े सैकड़ों व्यापारी जिला मुख्यालय पहुंचे और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस ने एमएलसी श्रीचंद शर्मा के दबाव में एकतरफा कार्रवाई करते हुए राजू छाबड़ा को जेल भेजा। व्यापारियों का यह भी दावा था कि दोनों पक्षों की FIR दर्ज हुई थीं, लेकिन कार्रवाई एक पक्ष के खिलाफ ज्यादा कठोर हुई। साथ ही व्यापारी संगठनों ने बाकायदा प्रशासन के सामने पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि अविनाश शर्मा अधिवक्ता हैं। ऐसे में जब उनके खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई तो नोएडा के कई अधिवक्ता एसपी सिटी कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वकीलों ने यह आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों के दबाव में क्रॉस FIR दर्ज की गई है। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने दोनों मुकदमों में निष्पक्ष विवेचना का आश्वासन दिया था और कहा था कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यहां से यह मामला केवल दो परिवारों का विवाद नहीं रह गया था। एक तरफ व्यापारी संगठन थे तो दूसरी तरफ वकीलों का संगठन सक्रिय था और बीच में पुलिस जांच थी।
अप्रैल 2022 में एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें यह दावा किया गया कि श्रीचंद शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और व्यापारी नेता सुभाष छाबड़ा के बीच इस मामले में वरिष्ठ लोगों की मौजूदगी में समझौता हो गया है, और दोनों ने आपसी सहमति से इस विवाद को सुलझा लिया है। यहां तक की यह भी खबर सामने आई कि राजू छाबड़ा ने श्रीचंद शर्मा से आशीर्वाद लिया।
अब सवाल यह होता है कि जब साल 2022 में श्री चंद्र शर्मा के बेटे अविनाश शर्मा और पारस छाबड़ा के परिवार के बीच में समझौता हो गया था तो अब 2026 में यह मामला फिर से चर्चा का विषय क्यों बना हुआ है? दरअसल श्रीचंद शर्मा अब फिर एक बार चुनावी मैदान में हैं। आज जब श्रीचंद शर्मा को भाजपा ने फिर मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है, तो इस पुराने प्रकरण की अंतिम कानूनी स्थिति सार्वजनिक होना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।
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