यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पीलीभीत के अकलीम अहमद मलिक को मिली बड़ी जिम्मेदारी के बाद पार्टी ने बूथ स्तर पर क्या लक्ष्य तय किया है। पढ़े पूरी खबर।

UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। चुनाव से पहले भाजपा ने मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी रणनीति के तहत पार्टी अब अल्पसंख्यक समाज में पकड़ रखने वाले नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंप रही है। इसी कड़ी में पीलीभीत के अकलीम अहमद मलिक को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के ब्रज क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी कार्यालय में उनका जोरदार स्वागत किया गया।
अकलीम अहमद मलिक को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब भाजपा की नजर ब्रज क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर है। नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष का दावा है कि मुस्लिम समाज के वोट हासिल करना आसान नहीं है, लेकिन पार्टी ने इसके लिए एक खास ब्लूप्रिंट तैयार किया है। अकलीम अहमद मलिक के मुताबिक, अल्पसंख्यक मोर्चा ने हर बूथ से 50 वोट हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करके और लोगों के बीच पहुंच बनाकर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
भाजपा के सामने मुस्लिम मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना आसान नहीं रहने वाला है। इसकी एक बड़ी वजह पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से पहले मुस्लिम समाज को लेकर दिए गए विवादित बयान भी हैं। पार्टी के एक मंत्री और विधायक द्वारा सार्वजनिक मंच से मुस्लिमों को अखिलेश यादव का वोटर बताने के साथ छोटा पजामा, बड़ा पजामा और जालीदार टोपी जैसी टिप्पणियां की गई थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि एक तरफ भाजपा मुस्लिम समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ नेताओं के पुराने बयान इस कोशिश के सामने चुनौती बन सकते हैं।
पार्टी नेताओं के पुराने बयानों को लेकर जब नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष अकलीम अहमद मलिक से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे राजनीति का हिस्सा बताया। उनका कहना था कि बयानबाजी इधर से भी होती है और उधर से भी होती है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि भाजपा के बूथ अध्यक्ष ने किसी मुस्लिम परिवार का राशन कार्ड बनवाने में मदद की है तो उस परिवार का वोट भाजपा को मिल सकता है। उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी अब सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्तर पर किए गए कामों के जरिए मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश में है।
क्या मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी भाजपा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में भाजपा के लिए इस वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है। अकलीम अहमद मलिक को मिली नई जिम्मेदारी इसी दिशा में पार्टी की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि, हर बूथ से 50 वोट हासिल करने का लक्ष्य कितना सफल होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा। अब देखना होगा कि भाजपा अपने नए क्षेत्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के बीच कितनी पकड़ बना पाती है और आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रुख किस ओर रहता है।
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