प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की एका नगर पंचायत की भाजपा अध्यक्ष माया देवी सागर को शासन ने अध्यक्ष पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2017 के नगर पंचायत चुनाव में उनकी उम्र को लेकर उठे विवाद के बाद की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की एका नगर पंचायत की भाजपा अध्यक्ष माया देवी सागर को शासन ने अध्यक्ष पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2017 के नगर पंचायत चुनाव में उनकी उम्र को लेकर उठे विवाद के बाद की गई है। मामले में शिकायत के बाद हाई कोर्ट का रुख सामने आया और उसके आदेश के बाद शासन स्तर पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। जांच में माया देवी के शैक्षणिक अभिलेखों में जन्मतिथि 1 अगस्त 1988 दर्ज होने की बात सामने आई। वहीं, 10 नवंबर 2017 को नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के समय उनकी उम्र करीब 29 साल 3 महीने बताई गई। नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है। इसी आधार पर उनकी चुनावी पात्रता को लेकर सवाल उठे।
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माया देवी सागर के खिलाफ एका निवासी उमेश चंद्र ने शिकायत की थी। आरोप था कि 2017 के नगर पंचायत चुनाव में नामांकन के दौरान उनकी वास्तविक उम्र निर्धारित न्यूनतम आयु से कम थी। शिकायत पर शासन स्तर से अपेक्षित कार्रवाई न होने के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत के आदेश के बाद सरकार ने मामले की जांच कराई और माया देवी को अपना पक्ष रखने तथा व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया। जांच में शैक्षणिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि 1 अगस्त 1988 दर्ज मिलने की बात सामने आने के बाद शासन ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 के तहत कार्रवाई की। इसके बाद उन्हें एका नगर पंचायत अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया।
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शासन के आदेश के बाद जसराना के उपजिलाधिकारी ऋषभ पुंडीर एका नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारियां संभाल लीं। अब अध्यक्ष पद पर उपचुनाव होने तक नगर पंचायत के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी के पास रहेंगे। इस कार्रवाई के बाद एका नगर पंचायत में अध्यक्ष पद खाली हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के बाद उपचुनाव कराया जाना है। तब तक नगर पंचायत का संचालन प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा।
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शासन की कार्रवाई के बाद माया देवी सागर ने इसे गलत बताया है। उनका कहना है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनका जन्मवर्ष 1986 दर्ज है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी हाईस्कूल की अंकतालिका खो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। उनके मुताबिक इस संबंध में उनके पास एफआईआर की प्रति भी मौजूद है। माया देवी ने कहा है कि वह शासन के आदेश को अदालत में चुनौती देंगी। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अदालत में उनका पक्ष सुना जाएगा।
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माया देवी सागर के बर्खास्त होने के बाद मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव न्यायिक चुनौती हो सकता है। एक तरफ शासन ने जांच और हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर कार्रवाई की है, वहीं माया देवी अपने दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले को चुनौती देने की बात कह रही हैं। ऐसे में अब उनकी संभावित कानूनी चुनौती और अदालत के अगले आदेश पर नजर रहेगी।
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