मौलाना मदनी के बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। इस मुद्दे पर जहां कांग्रेस ने उनका समर्थन किया है वहीं भाजपा उनके बयान को लेकर हमलावर हो गई है।

मौलाना अरशद मदनी (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा-ए-हिंद) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंदन और न्यूयॉर्क में मुसलमान मेयर बन सकते हैं, लेकिन भारत में कोई मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति नहीं बन सकता। साथ ही उन्होंने भारत के सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर चिंता जताई। मौलाना मदनी के इसी बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। इस मुद्दे पर जहां कांग्रेस ने उनका समर्थन किया है वहीं भाजपा उनके बयान को लेकर हमलावर हो गई है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि विपक्ष वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है। उनके अनुसार कुछ लोग आतंकवादियों को कवर फायर देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भी मुस्लिम समुदाय से थे और भारत के राष्ट्रपति बने थे। पूनावाला ने कहा कि मदनी के साथ कई विपक्षी नेता (चिदंबरम, महबूबा मुफ्ती, अबू आजमी आदि) भी इस मामले में आतंकवादियों के पक्ष में बयान दे रहे हैं। यह वोट की राजनीति नहीं तो और क्या है।