श्रीचंद शर्मा को भाजपा ने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट से दोबारा प्रत्याशी बनाया है। 2021 के शपथपत्र में दर्ज ‘साहित्य रत्न’ डिग्री की मान्यता पर उठे सवाल जानिए।

मेरठ/ग्रेटर नोएडा। (चेतना मंच)। भारतीय जनता पार्टी ने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा को एक बार फिर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। भाजपा के इस फैसले के बाद जहां उनके समर्थकों में उत्साह है, वहीं उनकी शैक्षणिक योग्यता और वर्ष 2021 के विधानसभा परिषद चुनाव के दौरान दिए गए चुनावी शपथपत्र में दर्ज डिग्री को लेकर गंभीर सवाल लगातार उठ रहें हैं।
श्रीचंद शर्मा को भाजपा ने पहली बार 2020 के विधान परिषद चुनाव में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में उन्होंने लंबे समय से इस सीट पर प्रभाव रखने वाले शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा को पराजित किया था। चेतना मंच की जानकारी के अनुसार ओमप्रकाश शर्मा लगभग 48 वर्षों तक इस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रहे थे। अब भाजपा ने आगामी चुनाव के लिए एक बार फिर श्रीचंद शर्मा पर भरोसा जताया है। ताजा जानकारी के अनुसार भाजपा द्वारा मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट से वर्तमान MLC श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बना दिया गया है।
भाजपा के MLC प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठ रहे सवालों का आधार उनके वर्ष 2021 के विधान परिषद चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए शपथपत्र से जुड़ा हुआ है। चेतना मंच के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार श्रीचंद शर्मा ने अपने चुनावी शपथपत्र में अपनी शैक्षणिक योग्यता के रूप में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से वर्ष 1987 में ‘साहित्य रत्न’ की परीक्षा/उपाधि प्राप्त करने का उल्लेख किया था। यही वह बिंदु है जिसको लेकर अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि जिस संस्था से श्रीचंद शर्मा ने यह योग्यता प्राप्त करने का दावा किया है, उसकी उपाधि को वर्तमान शिक्षा एवं रोजगार व्यवस्था में किस स्तर तक मान्यता प्राप्त है और क्या उसे सामान्य स्नातक डिग्री के समान माना जा सकता है? चेतना मंच ने यूजीसी के अधिकारियों से इस विषय में सवाल पूछा तो अधिकारियों ने बताया कि हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज के द्वारा दी जाने वाली साहित्य रत्न डिग्री से MLC का पद तो छोड़ दीजिए सरकारी विभाग में "चपरासी" की नौकरी तक भी नहीं मिल सकती। इसके बावजूद बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी के द्वारा फर्जी डिग्री के आधार पर MLC का टिकट दिया जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में श्रीचंद शर्मा को आँखे बंद करके टिकट दिया है। श्रीचंद शर्मा ने पार्टी को यह बताया है कि उनके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस सीट को कोई दूसरा नेता जीत ही नहीं सकता।
हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की विभिन्न परीक्षाओं और उपाधियों की मान्यता को लेकर पहले भी न्यायालयों में विवाद सामने आ चुके हैं। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा आयोजित ‘प्रथमा’ परीक्षा को एक समय मैट्रिक के समकक्ष मान्यता दी गई थी, लेकिन यह मान्यता 26 नवंबर 2010 तक बताई गई है। वहीं अलग-अलग परीक्षाओं की मान्यता अलग-अलग सरकारी आदेशों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसी विषय से जुड़े न्यायिक मामलों में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की कुछ उपाधियों को सरकारी नियुक्तियों के लिए मान्य योग्यता न मानने से संबंधित टिप्पणियां भी सामने आई हैं। एक न्यायिक निर्णय में संस्था की वैधानिक स्थिति तथा उसकी ओर से प्रदान की जाने वाली डिग्रियों की मान्यता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए गए थे।
श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भाजपा ने उम्मीदवार घोषित करने से पहले उनकी शैक्षणिक योग्यता, पुराने चुनावी शपथपत्र और उसमें दर्ज डिग्री की वैधानिक स्थिति की पूरी तरह जांच की? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग प्रकृति का होता है। इस निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक समुदाय अपने प्रतिनिधि का चुनाव करता है। ऐसे में उम्मीदवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शिक्षक के रूप में उसकी पात्रता स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण विषय बन ही जाती है।
श्रीचंद शर्मा के संबंध में उपलब्ध विवरण के अनुसार वर्ष 2021 के चुनावी शपथपत्र में उनकी संपत्ति और आय से संबंधित विवरण भी दर्ज था। जानकारी के अनुसार उन्होंने वर्ष 2019-20 की बैलेंस शीट के आधार पर अपनी संपत्तियों का विवरण लगभग ₹38,23,509 बताया था। इस आंकड़े को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और संपत्ति तथा आय के स्रोतों की सार्वजनिक जांच की मांग की जा रही है।
दादरी क्षेत्र में स्थित धूम मानिकपुर गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा श्रीचंद शर्मा की मौसी जी से बातचीत के आधार पर उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार श्रीचंद शर्मा मूल रूप से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के धूम मानिकपुर गांव के रहने वाले हैं। बताया गया है कि उनके पिता चमन लाल शर्मा सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। चमन लाल शर्मा साइकिल की छोटी सी दुकान चलाते थे और साइकिलों में पंचर आदि लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। बताए गए विवरण के अनुसार चमन लाल शर्मा का कम उम्र में ही बीमारी के कारण निधन हो गया था। उस समय श्रीचंद शर्मा, उनके भाई सुरेश शर्मा और उनकी बहन काफी छोटे थे। इसके बाद परिवार पर आर्थिक संकट और बढ़ गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत के अनुसार श्रीचंद शर्मा की मौसी ने उनके तथा उनके भाई-बहन के पालन-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दादरी के स्थानीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि श्रीचंद शर्मा की बड़ी बहन के विवाह में भी आर्थिक कठिनाइयां सामने आई थीं। बताया गया है कि उस समय धूम मानिकपुर गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर सहयोग किया और उनकी बहन का विवाह संपन्न कराया। यह विवरण श्रीचंद शर्मा की जीवन यात्रा के सामाजिक और आर्थिक संघर्ष को सामने रखता है।
आपको बता दें श्रीचंद शर्मा उर्फ चोटी की प्रारंभिक पढ़ाई एक गुरुकुल में हुई थी। बताया गया है कि इसी दौरान उन्हें हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से परीक्षा देने के संबंध में जानकारी मिली। स्थानीय स्रोतों के अनुसार उन्होंने घर से तैयारी करके परीक्षा दी और वर्ष 1987 में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से ‘साहित्य रत्न’ की उपाधि प्राप्त की। यही वह बिंदु है जिसकी अब सबसे अधिक जांच की आवश्यकता है। यदि 2021 के चुनावी शपथपत्र में यही योग्यता दर्ज है, तो भाजपा तथा संबंधित निर्वाचन प्राधिकरण के सामने यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि उस उपाधि को वर्ष 1987 में किस श्रेणी की शैक्षणिक योग्यता माना जाता था और आज उसकी वैधानिक स्थिति क्या है?
श्रीचंद शर्मा की राजनीतिक यात्रा में वर्ष 2020 का मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण रहा। सार्वजनिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा को पराजित किया था। ओमप्रकाश शर्मा लगभग 48 वर्षों तक इस सीट से जुड़े रहे और उनका प्रभाव शिक्षक राजनीति में काफी लंबा रहा। यही जीत श्रीचंद शर्मा के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है। अब 2026 में भाजपा ने उन्हें दोबारा इसी सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कई विधान परिषद सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं और मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा उर्फ चोटी को दोबारा मौका दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा हो सकती है कि भाजपा ने श्रीचंद शर्मा को दोबारा टिकट देने में उनके पिछले चुनावी प्रदर्शन, शिक्षक क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ और राजनीतिक समीकरणों को महत्व दिया है। लेकिन अब भाजपा के सामने दूसरा प्रश्न खड़ा हो गया है—क्या उम्मीदवार का पिछला चुनावी प्रदर्शन उसकी शैक्षणिक पात्रता और दस्तावेजों की जांच से अलग विषय है?
किसी चुनाव में जीत हासिल करना निश्चित रूप से राजनीतिक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन यदि उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठते हैं तो उन सवालों का तथ्यात्मक और दस्तावेजी उत्तर भी सामने आना ही चाहिए।
दादरी से मिली स्थानीय जानकारी के अनुसार श्रीचंद शर्मा को क्षेत्र में ‘चुटिया’ नाम से भी पुकारा जाता रहा है। बताया गया है कि ब्राह्मण परिवार से होने के कारण वह लोगों के घरों में शादी-विवाह तथा अन्य धार्मिक संस्कारों में कर्मकांड कराने जाते थे। इसी धार्मिक पहचान के कारण उन्होंने सिर पर लंबी चुटिया रखी हुई थी और इसी वजह से स्थानीय स्तर पर उन्हें ‘चुटिया’ कहकर भी संबोधित किया जाने लगा।
श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद सवाल केवल श्रीचंद शर्मा से संबंधित नहीं है। बड़ा सवाल भाजपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को लेकर है। यदि किसी उम्मीदवार के पुराने चुनावी शपथपत्र में दर्ज शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक बहस का विषय बनती है तो भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व स्वयं यह स्पष्ट कर सकता है कि उम्मीदवार के दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई।
क्या वर्ष 2021 में चुनाव आयोग को दिए गए शपथपत्र की शैक्षणिक योग्यता का सत्यापन किया गया था?
क्या ‘साहित्य रत्न’ की वर्ष 1987 वाली उपाधि को स्नातक के समकक्ष मानने वाला कोई सरकारी आदेश मौजूद है?
यदि है तो वह आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
और यदि ऐसी समकक्षता नहीं है तो फिर श्रीचंद शर्मा की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की पात्रता किस आधार पर निर्धारित हुई???
यह पूरा विषय किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि दस्तावेजों को सार्वजनिक जांच के सामने रखने का है। श्रीचंद शर्मा ने यदि वर्ष 2021 में अपने चुनावी शपथपत्र में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से वर्ष 1987 में ‘साहित्य रत्न’ प्राप्त करने की बात दर्ज की है, तो उस प्रमाणपत्र और उससे संबंधित सरकारी मान्यता की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए भाजपा नेतृत्व चाहे तो अपने स्तर पर भी इसकी जांच करा सकता है। यदि डिग्री वैध और संबंधित चुनावी पात्रता के लिए स्वीकार्य है तो विवाद समाप्त हो जाएगा। यदि कोई विसंगति है तो उसे भी दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है। लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण बात किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक पद के उम्मीदवार से जुड़े सवालों का दस्तावेजी उत्तर सामने आना है।
मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े चुनाव में यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि यहां प्रतिनिधि बनने वाले व्यक्ति की शिक्षा जगत से वास्तविक पात्रता और जुड़ाव क्या है। 2026 के चुनाव के लिए निर्वाचन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मेरठ-सहारनपुर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया है तथा वर्तमान शिक्षक MLC श्रीचंद शर्मा हैं। ऐसे समय में उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठे सवालों का समाधान चुनाव से पहले दस्तावेजों के माध्यम से होना सार्वजनिक हित में आवश्यक भी है और बीजेपी की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है।
श्रीचंद शर्मा को भाजपा ने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा प्रत्याशी बना दिया है। उनकी पिछली चुनावी जीत निर्विवाद रूप से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि रही है। लेकिन अब उनके वर्ष 2021 के चुनावी शपथपत्र में दर्ज शैक्षणिक योग्यता और वर्ष 1987 में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से प्राप्त बताई गई ‘साहित्य रत्न’ उपाधि की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों का सबसे सरल रास्ता यह है कि—मूल प्रमाणपत्र, उस समय लागू सरकारी आदेश और संबंधित संस्था की मान्यता की स्थिति सार्वजनिक कर दी जाए। इसके बाद जनता, शिक्षक समुदाय और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने तथ्य स्वयं स्पष्ट हो जाएंगे। यह मामला आरोप बनाम आरोप का नहीं, दस्तावेज बनाम दस्तावेज का होना ही चाहिए।
(इस विषय को लेकर श्रीचंद शर्मा के समर्थक सोशल मीडिया पर चेतना मंच की टीम तथा चेतना मंच के संपादक आर पी रघुवंशी को गलियां दे रहे हैं। उन समर्थकों को चेतना मंच यह बताना चाहता है कि भारतीय जनता पार्टी के सर्वोच्च नेता तथा भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी अनेक बार यह बता चुके हैं कि उन्हें जो ऊर्जा प्राप्त होती है वह ऊर्जा उनके विरोधियों द्वारा उन्हें रोज दी जाने वाली साढ़े चार लाख (4,50,000) गलियों से मिलती है।)
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