विज्ञापन
UP Politics: राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बंगाल में यूपी की टीम की भूमिका को खासा सराहा जा रहा है और उसी अनुभव को अब दोहराने की तैयारी है।

UP News: बंगाल जीत के बाद अब बीजेपी का ध्यान उत्तर प्रदेश की तरफ चला गया है। राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बंगाल में यूपी की टीम की भूमिका को खासा सराहा जा रहा है और उसी अनुभव को अब दोहराने की तैयारी है।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने बंगाल जीत के मुख्य रणनीतिकार बताए जा रहे हैं। मूल रूप से राजस्थान के बंसल ने अपना पहला चुनावी कौशल उत्तर प्रदेश में ही दिखाया था। उन्हें 2014 में पार्टी ने उत्तर प्रदेश का संगठन महामंत्री बनाया था। उनकी कुशल रणनीति 2017 और 2022 में बीजेपी की यूपी विजय का आधार बने। ऐसी चर्चा है उन्हें फिर से यूपी प्रभारी का पद दिया जा सकता है।
बंगाल में जुटी यूपी की टीम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी ने यूपी से पश्चिम बंगाल में चार मंत्रियों और एक पूर्व मंत्री को अक्टूबर से ही काम पर लगा दिया था। पार्टी ने पश्चिमी बंगाल को पांच क्षेत्रों में बांटा था। तीन का जिम्मा सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को दिया गया था। इनके अलावा भी कई जिलाध्यक्ष, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व संगठन मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद और संगठन की समझ रखने वाले करीब 1000 लोगों की भी अलग अलग चुनावी जिम्मेदारी दी गई थी।
पीएम मोदी ने दिया संकेत
पीएम मोदी ने 4 मई को बंगाल असम चुनावी जीत के बाद दी अपनी विक्ट्री स्पीच में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साध कर स्पष्ट कर दिया कि यूपी में बीजेपी पूरी ताकत झोंकने वाली है। पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘‘नारी शक्ति अब तेजी से एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, कुछ दिन पहले कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला शक्ति की इस गति को अवरुद्ध कर दिया।'' उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था।
पीएम मोदी ने कहा, ‘‘संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण को रोकने वाली समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ेगा. महिला विरोधी समाजवादी पार्टी चाहे कुछ भी कर ले, वह अपने पापों को कभी नहीं धो पाएगी।''
2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव न सिर्फ भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा। बंगाल का अनुभव कितना काम आता है, यह आने वाले महीनों में साफ होने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन