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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में ब्रज क्षेत्र के चर्चित गौ-रक्षक संत चंद्रशेखर, जिन्हें लोग 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जानते थे, उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शनिवार को हालात अचानक बिगड़ गए।

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UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में ब्रज क्षेत्र के चर्चित गौ-रक्षक संत चंद्रशेखर, जिन्हें लोग 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जानते थे, उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शनिवार को हालात अचानक बिगड़ गए। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और देखते ही देखते विरोध इतना बढ़ा कि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन को मौके पर स्थिति संभालने के लिए भारी बल तैनात करना पड़ा। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मथुरा में तड़के करीब 4 बजे संत चंद्रशेखर को कथित तौर पर गौ तस्करी से जुड़ी सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वह गांव नवीपुर के पास पहुंचे, जहां एक कंटेनर को रोकने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार दूसरे कंटेनर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना सामने आते ही उत्तर प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
जैसे ही 'फरसा वाले बाबा' की मौत की खबर ब्रज और आसपास के इलाकों में फैली, बड़ी संख्या में उनके समर्थक, गौ-रक्षक और स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर उमड़ पड़े। उत्तर प्रदेश में इस घटना ने भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया और आक्रोशित भीड़ ने विरोध स्वरूप दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में मौके से एक युवक को हिरासत में लिया है। वहीं, इस प्रकरण में शामिल तीन अन्य लोगों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की कई बिंदुओं पर पड़ताल की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मथुरा में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने भीड़ को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में उत्तर प्रदेश पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और रबर बुलेट का इस्तेमाल भी किया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अफरा-तफरी मच गई। हंगामे के बीच प्रदर्शनकारियों ने एडीएम प्रशासन की गाड़ी को भी निशाना बनाया। वाहन में तोड़फोड़ की गई, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए। झड़प के दौरान पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी है, ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े।
मथुरा और पूरे ब्रज क्षेत्र में संत चंद्रशेखर की पहचान एक तेजतर्रार और निडर गौ-रक्षक के रूप में थी। लोग उन्हें 'फरसा वाले बाबा' इसलिए कहते थे क्योंकि वह अक्सर हाथ में फरसा लेकर गौ-वंश की रक्षा के लिए सक्रिय रहते थे। उत्तर प्रदेश के ब्रज इलाके में वह गौरक्षा आंदोलन का एक जाना-पहचाना चेहरा माने जाते थे। अंजनौख क्षेत्र में उनका प्रवास रहता था और स्थानीय लोगों के बीच उनकी गहरी पकड़ बताई जाती है। 'फरसा वाले बाबा' केवल धार्मिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में गौरक्षा से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संत के रूप में देखे जाते थे। यही वजह है कि उनकी मौत की खबर सामने आते ही समर्थकों में गहरा आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इस घटना को सिर्फ हादसा मानने से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
मृतक संत का पार्थिव शरीर कोसी क्षेत्र से अंजनौख स्थित गौशाला ले जाए जाने की तैयारी की गई, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने वहां भी सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि अंतिम दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। UP News
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