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प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग से लेकर राजनीतिक हलकों तक हलचल मचा दी है। पल्लवपुरम थाने में तैनात दरोगा छत्रपाल सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग से लेकर राजनीतिक हलकों तक हलचल मचा दी है। पल्लवपुरम थाने में तैनात दरोगा छत्रपाल सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद उसकी न सिर्फ नौकरी खतरे में आ गई, बल्कि 5 मई को होने वाली शादी भी टूट गई। UP News
जानकारी के अनुसार, दरोगा छत्रपाल एक एनडीपीएस मामले में आरोपी महिला का नाम केस से हटाने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था। बताया जा रहा है कि इस केस में वह पहले ही एक बार 1 लाख रुपये ले चुका था, लेकिन नाम नहीं हटाया गया। इसके बाद उसने दोबारा 50 हजार रुपये की मांग की, जो बाद में 10 हजार रुपये पर तय हुई। इसी दौरान पीड़ित पक्ष ने एंटी करप्शन टीम को शिकायत दी और जाल बिछाया गया। जैसे ही दरोगा ने 10 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। UP News
दरोगा की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। 2023 बैच का यह दरोगा पल्लवपुरम थाने में तैनात था और अपने खिलाफ हुई कार्रवाई से विभागीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। एंटी करप्शन टीम अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है कि क्या इस तरह के अन्य लेन-देन भी पहले हुए हैं। UP News
इस मामले का सबसे बड़ा पहलू दरोगा की निजी जिंदगी से जुड़ा है। छत्रपाल की शादी उत्तर प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री की भतीजी से 5 मई को तय थी। घर में शादी की तैयारियां पूरे जोरों पर थीं, रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो चुका था, लेकिन गिरफ्तारी की खबर ने सबकुछ बदल दिया। जैसे ही मंत्री परिवार को इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत रिश्ता तोड़ने का फैसला कर लिया। UP News
जिस घर में कुछ दिन पहले तक शादी की खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। बारात की तैयारियां रोक दी गई हैं और पूरा माहौल बदल चुका है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद जब दरोगा को रिश्ता टूटने की खबर मिली तो वह बेहद भावुक हो गया और अपनी गलती पर पछतावा जताने लगा। फिलहाल एंटी करप्शन विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों इस मामले की जांच में जुटे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस केस में कोई और अधिकारी या व्यक्ति भी शामिल था। मेरठ का यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार का असर सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह निजी जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी पूरी तरह तबाह कर सकता है। UP News
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