मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में बसपा का राज्यस्तरीय कार्यक्रम। मायावती ने दी श्रद्धांजलि, इको गार्डन में जुटे कार्यकर्ता।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन आंदोलन को नई दिशा देने वाले मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी ने इस आयोजन के जरिए अपने संस्थापक के विचारों और सामाजिक परिवर्तन के मिशन को याद करने के साथ ही प्रदेशभर में संगठन की सक्रियता प्रदर्शित करने की तैयारी की थी। कार्यक्रम के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों और मंडलों से पार्टी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहन कुमारी मायावती ने लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में मान्यवर कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी मौजूद रहे। दूसरी ओर, लखनऊ के इको गार्डन स्थित मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के प्रदेशस्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी निर्धारित थी। कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में बसपा के इस आयोजन को पार्टी के सामाजिक आधार, कार्यकर्ता नेटवर्क और आगामी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र लखनऊ रहा। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 9 माल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय में कांशीराम को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी वहां मौजूद रहें। कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए मायावती ने उनके सामाजिक परिवर्तन और बहुजन समाज के राजनीतिक सशक्तीकरण के मिशन को याद किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कांशीराम के प्रयासों से वंचित और शोषित समुदायों को राजनीतिक भागीदारी का अवसर मिला। बसपा की राजनीति में कांशीराम की भूमिका केंद्रीय रही है। उन्होंने सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों को संगठित करने तथा उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था। मायावती ने भी अपने राजनीतिक सफर और उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों को कांशीराम के मिशन से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
लखनऊ के इको गार्डन स्थित मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल पर पुण्यतिथि के अवसर पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी की ओर से पहले ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न मंडलों और जिलों के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई थी। कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी सक्रिय रहे। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को कांशीराम के विचारों और उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने का संदेश देने के लिए राजधानी में एकत्र होने को कहा था। लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भागीदारी को बसपा के संगठनात्मक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों के कार्यकर्ता आम तौर पर नोएडा स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर भी कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष नोएडा के इस स्मारक स्थल पर रखरखाव और नवीनीकरण का काम जारी होने की खबरों के बीच बसपा ने लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यक्रम की तैयारी की। लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल बहुजन आंदोलन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं को बुलाने की योजना बनाई गई थी। इस बदलाव के कारण इस बार कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा की गतिविधियों का मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश की राजधानी बनी। इससे पार्टी को राज्यस्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को एक स्थान पर एकत्र करने का अवसर भी मिला।
मान्यवर कांशीराम का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक रूप से वंचित समुदायों को संगठित करने और उनके राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित किया। उन्होंने बामसेफ और दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (डीएस-4) के माध्यम से सामाजिक संगठन की दिशा में काम किया। बाद में 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की। उनकी राजनीति का प्रमुख उद्देश्य बहुजन समाज को लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रभावी प्रतिनिधित्व दिलाना था। कांशीराम ने सामाजिक सम्मान, राजनीतिक भागीदारी और सत्ता में हिस्सेदारी को अपने आंदोलन के महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में सामने रखा। उनके प्रयासों से उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति का विस्तार हुआ और बसपा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी। 9 अक्टूबर 2006 को उनका निधन हुआ था। वर्ष 2026 में उनकी 20वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने के प्रयास कर रहे हैं। बसपा के लिए कांशीराम की पुण्यतिथि का कार्यक्रम केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को संस्थापक के विचारों से जोड़ने का भी अवसर है। पार्टी की राजनीति लंबे समय से सामाजिक न्याय, दलित प्रतिनिधित्व और बहुजन समाज के राजनीतिक सशक्तीकरण के मुद्दों के इर्द-गिर्द रही है। ऐसे में राजधानी में राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने से पार्टी को अपने संगठनात्मक नेटवर्क को सक्रिय करने का अवसर मिला।
मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम ने उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मायावती द्वारा केंद्रीय कैंप कार्यालय में श्रद्धांजलि अर्पित करना और इको गार्डन में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन, दोनों ही गतिविधियां बसपा के लिए इस दिन के महत्व को दर्शाती हैं। कांशीराम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक संगठनों के माध्यम से वंचित समुदायों को संगठित कर लोकतांत्रिक राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम इसी ऐतिहासिक विरासत को याद करने का अवसर है।
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