उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बढ़ेगी सहूलियत
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब यदि किसी उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर रिचार्ज करा दिया, लेकिन इसके बावजूद दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा।

UP News : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब यदि किसी उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर रिचार्ज करा दिया, लेकिन इसके बावजूद दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से जुड़ी इस व्यवस्था के तहत ऐसी स्थिति में 50 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि यह नियम उन उपभोक्ताओं पर लागू होगा, जिनकी बिजली स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होने के कारण कटी हो और रिचार्ज के बाद भी तय समय में आपूर्ति शुरू न की जाए। माना जा रहा है कि 13 मार्च से यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू हो सकती है, जिससे उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
70 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था तेजी से लागू की जा रही है और इसका प्रभाव अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के करीब 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ता इस नियम के दायरे में आएंगे। यही नहीं, इन उपभोक्ताओं के खातों में बड़ी मात्रा में निगेटिव बैलेंस भी दर्ज बताया जा रहा है, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा अहम हो गया है। बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर रिचार्ज, बैलेंस कटने और बिजली बहाल होने में देरी जैसी समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष रहा है। ऐसे में मुआवजा व्यवस्था उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैलेंस खत्म होते ही अपने आप कट सकती है बिजली
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर प्रणाली को अब और अधिक सख्ती के साथ लागू करने की तैयारी है। बिजली विभाग के अनुसार, यदि 13 मार्च के बाद किसी उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर का बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो उसकी बिजली सप्लाई स्वतः बंद हो सकती है। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए संचालित होगी और इसके लिए बिजली कर्मचारियों को मौके पर जाकर कनेक्शन काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विभाग का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में इस नई व्यवस्था से बिजली बिलिंग से जुड़ी पुरानी दिक्कतों में कमी आएगी। गलत बिल जारी होने, औसत बिलिंग की शिकायतों और बकाया भुगतान से जुड़े विवादों को कम करने में स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम मददगार साबित हो सकता है।
अतिरिक्त वसूली पर भी उपभोक्ताओं को राहत
इससे पहले भी उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को राहत देते हुए एक अहम आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए। आदेश के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया गया है, वह रकम उनके बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाई जाएगी।
बताया गया है कि यह अतिरिक्त वसूली करीब 127 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरी राहत मिलने की संभावना है UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब यदि किसी उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर रिचार्ज करा दिया, लेकिन इसके बावजूद दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से जुड़ी इस व्यवस्था के तहत ऐसी स्थिति में 50 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि यह नियम उन उपभोक्ताओं पर लागू होगा, जिनकी बिजली स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होने के कारण कटी हो और रिचार्ज के बाद भी तय समय में आपूर्ति शुरू न की जाए। माना जा रहा है कि 13 मार्च से यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू हो सकती है, जिससे उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
70 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था तेजी से लागू की जा रही है और इसका प्रभाव अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के करीब 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ता इस नियम के दायरे में आएंगे। यही नहीं, इन उपभोक्ताओं के खातों में बड़ी मात्रा में निगेटिव बैलेंस भी दर्ज बताया जा रहा है, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा अहम हो गया है। बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर रिचार्ज, बैलेंस कटने और बिजली बहाल होने में देरी जैसी समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष रहा है। ऐसे में मुआवजा व्यवस्था उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैलेंस खत्म होते ही अपने आप कट सकती है बिजली
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर प्रणाली को अब और अधिक सख्ती के साथ लागू करने की तैयारी है। बिजली विभाग के अनुसार, यदि 13 मार्च के बाद किसी उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर का बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो उसकी बिजली सप्लाई स्वतः बंद हो सकती है। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए संचालित होगी और इसके लिए बिजली कर्मचारियों को मौके पर जाकर कनेक्शन काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विभाग का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में इस नई व्यवस्था से बिजली बिलिंग से जुड़ी पुरानी दिक्कतों में कमी आएगी। गलत बिल जारी होने, औसत बिलिंग की शिकायतों और बकाया भुगतान से जुड़े विवादों को कम करने में स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम मददगार साबित हो सकता है।
अतिरिक्त वसूली पर भी उपभोक्ताओं को राहत
इससे पहले भी उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को राहत देते हुए एक अहम आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए। आदेश के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया गया है, वह रकम उनके बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाई जाएगी।
बताया गया है कि यह अतिरिक्त वसूली करीब 127 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरी राहत मिलने की संभावना है UP News












