प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इनके संचालन के लिए कोई स्पष्ट राज्य स्तरीय व्यवस्था नहीं थी।

UP News : उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इनके संचालन के लिए कोई स्पष्ट राज्य स्तरीय व्यवस्था नहीं थी। मनमाना किराया, यात्रियों की सुरक्षा, महिलाओं से जुड़े मामलों, ड्राइवरों के सत्यापन, शिकायतों के निस्तारण और दुर्घटना के समय जिम्मेदारी तय करने जैसी कई समस्याएं लगातार सामने आ रही थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए सरकार नई एग्रीगेटर पॉलिसी ला रही है।
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नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार के लिए कैब कंपनियों की निगरानी करना आसान होगा। पुलिस जांच, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, टैक्स वसूली और नियमों के पालन पर भी बेहतर नियंत्रण रहेगा। वहीं यात्रियों को पारदर्शी किराया, सुरक्षित सफर और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा, सुरक्षा उपकरण और लाइसेंस जैसी नई अनिवार्य व्यवस्थाओं से कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में भविष्य में कुछ कंपनियां बेस फेयर बढ़ाने या कमीशन मॉडल में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि नई पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और ड्राइवरों के हितों की रक्षा करते हुए ऐप आधारित परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
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राज्य में काम करने वाली सभी एग्रीगेटर कंपनियों को सरकार से लाइसेंस लेना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक लाइसेंस शुल्क 5 लाख रुपये, नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपये और 50 लाख रुपये तक सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस या टेंडर भी रद किया जा सकेगा। UP News
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