अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, ओवैसी संग गठबंधन पर भी दिया बयान

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सत्ता सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, उपचुनाव में धांधली और आयोग की निष्पक्षता को लेकर कई आरोप लगाए।

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locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 07:13 PM
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UP News : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सत्ता सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, उपचुनाव में धांधली और आयोग की निष्पक्षता को लेकर कई आरोप लगाए। साथ ही, उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और संभावित गठबंधनों पर भी खुलकर बात की।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग का काम वोट जोड़ने का होना चाहिए, लेकिन इसके उलट वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जो अभी जीवित हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस तरह की शिकायतों पर आयोग ने क्या कार्रवाई की।

महाभियोग प्रस्ताव पर दी सफाई

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर उन्होंने कहा कि यह कदम उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए उठाया गया। उनके मुताबिक, जब चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता है, तो लोकतंत्र पर भी असर पड़ता है। सपा प्रमुख ने उपचुनावों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित नहीं किया गया। साथ ही, उन्होंने सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग का भी जिक्र किया, जिसे कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया।

वोट कटने को लेकर खास समुदायों का जिक्र

अखिलेश यादव ने दावा किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और मुस्लिम समाज के लोगों को ज्यादा प्रभावित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तखत के जरिए कई लोगों के नाम हटाए गए, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति

आगामी यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का फोकस स्पष्ट है बीजेपी को हराना। उन्होंने संकेत दिए कि कांग्रेस के साथ गठबंधन आगे भी जारी रह सकता है और दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी के साथ संभावित गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता अपनी मौजूदा रणनीति को मजबूत करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को साथ जोड़ना है। अखिलेश यादव के बयान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर बहस को तेज कर दिया है। वहीं, 2027 के चुनाव को लेकर सपा की रणनीति और संभावित गठबंधनों पर भी राजनीतिक चचार्एं शुरू हो गई हैं। आने वाले समय में इन मुद्दों पर सियासत और गरमाने की संभावना है।


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AIMIM नेता हाजी शौकत अली का विवादित बयान, कहा-एनकाउंटर का जवाब उसी भाषा में देंगे

मेरठ में एक बार फिर सियासी बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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शौकत अली के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 05:10 PM
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UP News : मेरठ में एक बार फिर सियासी बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

ईद मिलन समारोह में दिया गया विवादित बयान

जानकारी के मुताबिक, मेरठ में आयोजित एक ईद मिलन कार्यक्रम के दौरान हाजी शौकत अली ने कथित तौर पर कहा कि अगर मुसलमानों का एनकाउंटर होगा तो उसका जवाब भी उसी तरीके से दिया जाएगा। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया और मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है जब हाजी शौकत अली अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर उनके बयान विवादों में रहे हैं। साल 2023 में, जब यूपी में निकाय चुनाव चल रहे थे, उस दौरान उन्होंने माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद की हत्या को लेकर मंच से तीखी टिप्पणी की थी, जिसके बाद भी उन पर मामला दर्ज हुआ था। अब एक बार फिर इस मामले में मेरठ के लोहियानगर थाने में हाजी शौकत अली के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बयान को गंभीर मानते हुए भड़काऊ भाषण से संबंधित धाराओं में मुकदमा कायम किया है और आगे की जांच शुरू कर दी है।

संभल और मुरादाबाद के बयान भी बने थे विवाद का कारण

संभल में एक जनसभा के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसके अलावा मुरादाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनसंख्या को लेकर भी बयान दिया था, जो काफी चर्चा में रहा। इस बयान पर भी विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से गमार्या माहौल

इस ताजा मामले के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ नेताओं ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया है, जबकि समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। कार्यक्रम के वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मेरठ का यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगी।


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उत्तर प्रदेश में सीट विस्तार की आहट, महिला आरक्षण बनेगा गेमचेंजर

अगर केंद्र सरकार की प्रस्तावित योजना पर सहमति बनती है, तो उत्तर प्रदेश में 2029 के लोकसभा चुनाव से सांसदों की सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि 2032 के विधानसभा चुनाव तक विधायकों की सीटों में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़
उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 04:06 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। अगर केंद्र सरकार की प्रस्तावित योजना पर सहमति बनती है, तो उत्तर प्रदेश में 2029 के लोकसभा चुनाव से सांसदों की सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि 2032 के विधानसभा चुनाव तक विधायकों की सीटों में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में भी तेजी से काम होने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए जरूरी संवैधानिक और कानूनी बदलावों पर विचार कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस विषय पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जा सकती है, ताकि सभी दलों के सुझाव लेकर आगे की रणनीति तय की जा सके।

उत्तर प्रदेश में 80 से 120 लोकसभा सीट होने की चर्चा

यदि सरकार के प्रस्ताव पर आम राय बनती है, तो सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य पर पड़ सकता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं, लेकिन नई योजना के तहत इन्हें बढ़ाकर 120 किए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में इनमें से करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। इस बदलाव का मतलब यह होगा कि उत्तर प्रदेश की संसदीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत रूप में सामने आएगी। इससे प्रदेश की चुनावी रणनीति, दलों की टिकट नीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व तीनों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

विधानसभा में भी उत्तर प्रदेश देख सकता है बड़ा विस्तार

केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा 403 सीटों को भी बढ़ाकर 603 किए जाने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है, तो इनमें से लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। यह बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए सामाजिक और प्रतिनिधिक संतुलन की शुरुआत कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य में सीटों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय संतुलन, जनप्रतिनिधित्व और चुनावी प्रतिस्पर्धा का नया ढांचा तैयार होगा। महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने से राजनीतिक दलों को भी अपने संगठन और नेतृत्व संरचना में बदलाव करना पड़ सकता है।

2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ सकती है प्रक्रिया

बैठक में शामिल नेताओं के हवाले से यह बात सामने आई है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन और नई जनगणना के अंतिम नतीजों का लंबा इंतजार नहीं करना चाहती। चर्चा इस बात पर भी हुई कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस सोच के पीछे एक बड़ा राजनीतिक कारण भी माना जा रहा है। कई राज्यों में लंबे समय से यह आशंका जताई जाती रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद सीटों के बंटवारे में नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में पुरानी जनगणना के आधार पर आगे बढ़ने का रास्ता उन राज्यों की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर सकता है।

एससी-एसटी सीटों में भी महिला आरक्षण का फार्मूला संभव

सरकार की सोच केवल सामान्य सीटों तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित ढांचे में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों में भी उसी अनुपात में महिला आरक्षण लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यानी आरक्षण का दायरा व्यापक हो सकता है और इसका असर उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की सामाजिक प्रतिनिधित्व वाली राजनीति पर दिखाई दे सकता है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की व्यापक योजना में लोकसभा की कुल 543 सीटों को बढ़ाकर 816 तक किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। यदि यह मॉडल लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी उसी अनुपात में सीटों का पुनर्गठन संभव माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या होगा असर?

अगर यह पूरा प्रस्ताव अमल में आता है, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति का चरित्र बदल सकता है। अब तक जातीय, क्षेत्रीय और दलगत समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाने वाले दलों को महिला नेतृत्व को केंद्र में रखकर नई राजनीतिक जमीन तैयार करनी होगी। प्रदेश में नए निर्वाचन क्षेत्र बन सकते हैं, पुराने समीकरण टूट सकते हैं और महिला प्रतिनिधित्व का नया अध्याय शुरू हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सीटें बढ़ने और महिला आरक्षण लागू होने से चुनावी मुकाबले का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। इससे न सिर्फ विधानसभा और लोकसभा चुनाव अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए चेहरों के उभरने की संभावना भी बढ़ेगी।

सरकार अभी रायशुमारी के दौर में

फिलहाल केंद्र सरकार इस पूरे मसले पर सहयोगी दलों और विपक्ष से बातचीत कर रही है। अगर व्यापक सहमति बन जाती है, तो संसद के मौजूदा बजट सत्र में या फिर किसी विशेष सत्र के जरिए कानून में जरूरी संशोधन लाए जा सकते हैं। इसके बाद महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में फिर चर्चा के केंद्र में हो सकता है। UP News

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