राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का रास्ता चुना है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने अयोध्या में रहकर चार महीने तक चातुर्मास साधना करने का संकल्प लिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का रास्ता चुना है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने अयोध्या में रहकर चार महीने तक चातुर्मास साधना करने का संकल्प लिया है। धार्मिक दृष्टि से उनके इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को चंपत राय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भवन में विधि-विधान के साथ अपनी साधना की शुरुआत की। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह 21 नवंबर तक अयोध्या में ही रहेंगे और इस अवधि में जप, ध्यान, स्वाध्याय और धार्मिक अनुष्ठानों में समय व्यतीत करेंगे। UP News
चातुर्मास अवधि के दौरान चंपत राय प्रतिदिन राम मंत्र का जाप, श्रीरामचरितमानस का पाठ और भगवान श्रीराम की आराधना करेंगे। इसके अलावा उन्होंने रोजाना छह घंटे मौन व्रत रखने का भी निर्णय लिया है। आध्यात्मिक परंपरा में मौन साधना को आत्मचिंतन, मानसिक एकाग्रता और आंतरिक शांति का माध्यम माना जाता है। इस चार महीने की अवधि में चंपत राय सार्वजनिक गतिविधियों से दूरी बनाकर साधना और धार्मिक अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। UP News
सनातन परंपरा में चातुर्मास को साधना, संयम और आत्मशुद्धि का विशेष काल माना जाता है। इसकी शुरुआत आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से होती है और समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसी कारण संत-महात्मा और साधक एक स्थान पर रहकर जप, तप, स्वाध्याय, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में समय बिताते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, चातुर्मास के दौरान राम नाम का स्मरण, धार्मिक ग्रंथों का पाठ, दान-पुण्य और सात्विक जीवन का विशेष महत्व होता है। अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी में इस अवधि में साधना करना आध्यात्मिक रूप से विशेष फलदायी माना जाता है। UP News
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