उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने वाले एक बेहद शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने वाले एक बेहद शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह पर आरोप है कि वह महिलाओं को सुनसान ठिकाने पर ले जाकर बंधक बनाता था, उनके अश्लील वीडियो तैयार करता और फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं तथा उनके परिजनों से पैसे वसूलता था। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि गिरोह की महिला सदस्य खुद को CBI अधिकारी बताकर पीड़िताओं को डराती-धमकाती थी। मुगलसराय पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के कथित सरगना, उसकी पत्नी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम कार्ड, फर्जी पहचान पत्र, बैंक संबंधी दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच कर गिरोह के नेटवर्क और इसके संभावित अन्य शिकारों की जानकारी जुटा रही है। UP News
पुलिस के अनुसार, गिरोह महिलाओं को नौकरी दिलाने या मकान उपलब्ध कराने का झांसा देकर अपने संपर्क में लाता था। इसके बाद उन्हें रामनगर चौराहे से डहिया स्थित एक मकान पर ले जाया जाता था। आरोप है कि मकान पर पहुंचने के बाद महिलाओं को बंधक बना लिया जाता था। इसके बाद उनके अश्लील वीडियो बनाए जाते और इन वीडियो को सोशल मीडिया या उनके परिचितों के बीच वायरल करने की धमकी दी जाती थी। इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी पीड़िता और उसके परिवार से रकम की मांग करते थे। इस तरह नौकरी और मकान का लालच देकर शुरू किया गया संपर्क कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग और धन उगाही के संगठित अपराध में बदल जाता था। UP News
मामले का खुलासा दो महिलाओं की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, एक पीड़िता को मई महीने में करीब दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। आरोप है कि उससे परिजनों से 30 हजार रुपये मंगवाए गए। इसके अलावा उसके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर करीब 75 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। दूसरी पीड़िता के साथ अगस्त में इसी तरह की वारदात किए जाने का आरोप है। उससे कथित तौर पर पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। इस दौरान उसके खाते से करीब 1.14 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। हालांकि, दूसरी पीड़िता किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलने में सफल रही। पुलिस के मुताबिक, वह छत के रास्ते भागकर अपनी जान बचाकर बाहर निकली और इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी। UP News
पुलिस जांच में मुख्य आरोपी के रूप में विजय कुमार गुप्ता उर्फ रॉकी का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विजय ने अपने भाई कृष्ण कुमार, पत्नी अंजली गुप्ता और परिचित रैपिडो चालक विशम्भर विश्वकर्मा के साथ मिलकर कथित तौर पर यह गिरोह बनाया था। जांच के मुताबिक, गिरोह में प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग थी। विशम्भर विश्वकर्मा महिलाओं को मकान या नौकरी दिलाने के बहाने बताए गए ठिकाने तक पहुंचाने का काम करता था। इसके बाद अन्य आरोपी कथित तौर पर महिलाओं को बंधक बनाकर ब्लैकमेलिंग और वसूली करते थे। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। UP News
इस पूरे मामले में आरोपी अंजली गुप्ता की भूमिका भी पुलिस जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, वह खुद को CBI अधिकारी बताकर पीड़िताओं को प्रभावित और भयभीत करती थी। किसी महिला के सामने यदि कोई सरकारी अधिकारी होने का दावा करे तो स्वाभाविक रूप से उसके ऊपर दबाव बन सकता है। पुलिस को आशंका है कि इसी तरीके का इस्तेमाल कर पीड़िताओं को डराया जाता था, ताकि वे आरोपियों के खिलाफ आवाज न उठा सकें और मांगी गई रकम देने के लिए मजबूर हो जाएं। फर्जी पहचान पत्रों की बरामदगी के बाद पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है। UP News
पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए 28 अगस्त को डहिया-बद्रीपुरम कॉलोनी स्थित मकान पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने विजय कुमार गुप्ता उर्फ रॉकी, कृष्ण कुमार, अंजली गुप्ता और विशम्भर विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, यह वही मकान बताया जा रहा है जहां महिलाओं को ले जाकर बंधक बनाने और ब्लैकमेल करने की शिकायत सामने आई थी। UP News
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। बरामदगी में शामिल हैं—
पुलिस का मानना है कि बरामद मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेज इस पूरे नेटवर्क की जांच में अहम सुराग साबित हो सकते हैं। UP News
फिलहाल पुलिस के सामने दो पीड़िताओं के मामले सामने आए हैं, लेकिन जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरोह ने इससे अधिक महिलाओं को अपना शिकार बनाया हो सकता है। बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितनी महिलाओं से संपर्क किया, कितनों को अपने ठिकाने तक पहुंचाया और कितने लोगों से ब्लैकमेलिंग के जरिए रकम वसूली गई। इसके अलावा पुलिस गिरोह के संभावित अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है। UP News
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि नौकरी, किराए के मकान या किसी अन्य सुविधा का लालच देकर अपराधी किस तरह लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं। विशेष रूप से नौकरी की तलाश कर रही महिलाओं को किसी अनजान व्यक्ति के भरोसे अकेले किसी अज्ञात स्थान पर जाने से बचना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी अधिकारी होने का दावा किए जाने पर उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति धमकी देकर पैसे मांगता है या निजी सामग्री वायरल करने की धमकी देता है तो डरकर भुगतान करने के बजाय तत्काल पुलिस की सहायता लेनी चाहिए। UP News
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