चंदौली के इकौनी गांव ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। यहां 124 घरों को गोबर गैस प्लांट से मात्र 500 रुपये महीने में गैस मिल रही है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हुई है।

उत्तर प्रदेश, चंदौली। मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालातों के चलते देशभर में एलपीजी गैस की किल्लत देखने को मिल रही है। गैस सिलिंडर की बुकिंग के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और आम लोगों को एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे संकट के दौर में चंदौली जिले का इकौनी गांव आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां पिछले पांच वर्षों से गोबर गैस प्लांट के माध्यम से 124 घरों को नियमित गैस आपूर्ति की जा रही है।
गांव के युवा उद्यमी चंद्र प्रकाश सिंह की पहल से स्थापित यह बायोगैस संयंत्र आज पूरे गांव के लिए राहत का माध्यम बन चुका है। 350 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले इस प्लांट से रोजाना करीब 100 क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन किया जाता है, जिसे पाइपलाइन के जरिए घर-घर पहुंचाया जाता है।
सुबह और शाम तीन-तीन घंटे गैस की आपूर्ति की जाती है, जिससे ग्रामीणों को एलपीजी सिलिंडर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
ग्रामीणों के लिए यह व्यवस्था बेहद किफायती भी साबित हो रही है। हर घर को मात्र 500 रुपये मासिक खर्च में गैस मिल रही है, जो एलपीजी की तुलना में काफी सस्ती है।
गृहिणियों का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि घरेलू बजट पर भी कम बोझ पड़ रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ यह पहल पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है। गोबर गैस के उपयोग से प्रदूषण कम हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।
इकौनी गांव की इस सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों में भी बायोगैस संयंत्र लगाने की चर्चा शुरू हो गई है। यह मॉडल ग्रामीण आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक ऊर्जा का एक बेहतरीन उदाहरण बनता जा रहा है।