उत्तर प्रदेश के चंदौली में दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह करने पर बेटी से नाराज पिता ने उसका पिंडदान कर दिया। जानिए जगदीशराय गांव की चौंकाने वाली घटना।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने परिवार, सामाजिक प्रतिष्ठा और अपनी पसंद से शादी करने के अधिकार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां एक पिता ने अपनी ही जीवित बेटी का पिंडदान कर दिया। बताया जा रहा है कि बेटी ने परिवार की मर्जी के खिलाफ दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह किया था। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता ने पितृ विसर्जन के अवसर पर उसका श्राद्ध कर अपने संबंध खत्म करने का ऐलान कर दिया।
यह मामला चंदौली जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित जगदीशराय गांव का बताया जा रहा है। घटना की चर्चा क्षेत्र में तेजी से हो रही है। एक तरफ पिता अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह मामला वयस्कों के विवाह संबंधी फैसलों और पारिवारिक रिश्तों पर सवाल खड़े कर रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, जगदीशराय गांव निवासी प्रकाश सिंह की बेटी नेहा सिंह ने परिवार की इच्छा के विपरीत दूसरी जाति के युवक के साथ प्रेम विवाह कर लिया। बताया जाता है कि पिता ने बेटी को अपना फैसला बदलने और परिवार की बात मानने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन बेटी अपने निर्णय पर कायम रही। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने पितृ विसर्जन के अवसर पर अपनी जीवित बेटी का पिंडदान और श्राद्ध कर दिया। इस प्रतीकात्मक कर्मकांड के जरिए उन्होंने बेटी से अपने संबंध समाप्त करने का संदेश दिया।
बेटी के प्रेम विवाह से आहत प्रकाश सिंह ने कथित तौर पर कहा कि अब उनका बेटी से कोई रिश्ता नहीं है। उन्होंने अपने बयान में परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचने और बेटी के फैसले से गहरा दुख होने की बात कही। पिता के मुताबिक, उन्होंने बेटी को समझाने की कोशिश की थी, लेकिन जब उसने उनकी बात नहीं मानी तो उन्होंने उससे संबंध तोड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने भावुक और नाराजगी भरे अंदाज में कहा कि बेटी उनके लिए मर चुकी है। पिता का यह कदम परिवार की नाराजगी की गंभीरता को दिखाता है। हालांकि, इस घटना के सभी पहलुओं और परिवार के अन्य सदस्यों की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चंदौली की यह घटना केवल एक परिवार तक सीमित मामला नहीं है। यह समाज में अंतरजातीय विवाह को लेकर मौजूद मतभेदों और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच टकराव को भी सामने लाती है। एक ओर माता-पिता अपनी पारिवारिक परंपराओं, सामाजिक मान्यताओं और प्रतिष्ठा को महत्वपूर्ण मानते हैं, तो दूसरी ओर वयस्क युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी का चुनाव स्वयं करना चाहते हैं। जब इन दोनों के बीच सहमति नहीं बनती, तो कई बार रिश्तों में ऐसी दरार पैदा हो जाती है जिसे भरना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, किसी विवाह को लेकर असहमति होना और किसी व्यक्ति से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ देना दो अलग-अलग बातें हैं। ऐसे मामलों में संवाद, आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण समाधान की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत में वयस्क व्यक्तियों को कानून के दायरे में अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार प्राप्त है। केवल दूसरी जाति में विवाह करना अपने आप में किसी अपराध का आधार नहीं है। परिवार की असहमति के बावजूद, यदि दोनों पक्ष कानूनी रूप से विवाह के योग्य हैं और अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करते हैं, तो उनके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। चंदौली की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सामाजिक प्रतिष्ठा और जातिगत मान्यताएं माता-पिता और बच्चों के रिश्तों से भी बड़ी हो सकती हैं?
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