उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के ग्राम एकौनी में गौशाला से संचालित बायोगैस प्लांट से 125 घरों को सस्ती गैस मिल रही है। जानिए कैसे यह मॉडल ग्रामीण विकास, रोजगार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रहा है।

उत्तर प्रदेश में चंदौली जनपद के पीडीडीयू नगर तहसील अंतर्गत ग्राम एकौनी में स्थापित गौशाला और बायोगैस प्लांट आत्मनिर्भरता का अनूठा मॉडल बनकर उभरा है। जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग ने स्थल का निरीक्षण कर इस पहल की सराहना की और इसे अन्य गांवों में भी लागू करने के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश के चंदौली के ग्राम एकौनी में युवा किसान चंद्रप्रकाश सिंह द्वारा संचालित गौशाला में करीब 200 गायों का पालन किया जा रहा है। इन गायों से प्राप्त गोबर के उपयोग से 350 क्यूबिक मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है, जिससे पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 120 से 125 घरों में नियमित गैस की आपूर्ति की जा रही है।
ग्रामीणों को मात्र 500 रुपये प्रति माह में गैस मिल रही है, जो एलपीजी की तुलना में काफी सस्ती है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इस परियोजना को आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसे बड़े स्तर पर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नावार्ड और उद्योग विभाग को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा अन्य गौशालाओं में भी ऐसे प्लांट लगाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि प्रतिदिन करीब 3000 किलो गोबर का उपयोग कर बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जा रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को ऑर्गेनिक खाद भी मिल रही है।
इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।