चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने दान गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। पुराने कर्मियों को हटाकर SBI के स्थायी कर्मचारियों की नई टीम तैनात की गई है। अब नकद चढ़ावे की गिनती दो शिफ्टों में कड़ी निगरानी के बीच होगी।

UP News : राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी रहने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने दान गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मंदिर के दान पात्रों में जमा नकद चढ़ावे की गिनती करने वाले सभी पुराने कर्मियों को हटा दिया गया है। उनकी जगह अब SBI के स्थायी कर्मचारियों की नई टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य दान की गिनती में पारदर्शिता बढ़ाना, सुरक्षा मजबूत करना और भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को खत्म करना है।
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जानकारी के अनुसार पहले दान की गिनती करने वाली टीम के 23 कर्मचारियों ने हाल ही में नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद टीम में बचे 13 कर्मचारियों को भी अब हटा दिया गया है। इनके आई-कार्ड और ड्रेस भी वापस ले लिए गए हैं और उन्हें आगे ड्यूटी पर नहीं बुलाने का निर्णय लिया गया है। ये कर्मचारी एक निजी एजेंसी के माध्यम से ट्रस्ट की अनुशंसा पर SBI के लिए कार्यरत थे।
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नई व्यवस्था के तहत नकद चढ़ावे की गिनती अब दो शिफ्टों में कराई जा रही है। प्रत्येक शिफ्ट में 12 से 13 स्थायी SBI कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पूरी प्रक्रिया SBI की निगरानी में संचालित होगी, जबकि व्यवस्था की देखरेख के लिए एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को प्रभारी बनाया गया है। ट्रस्ट का मानना है कि इससे गिनती की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगी।
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहा है। जांच के दौरान दान की गिनती की प्रक्रिया, कर्मचारियों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ट्रस्ट और SBI ने पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करने का फैसला लिया।
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काम से हटाए गए कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि एक कर्मचारी के लिए ट्रस्ट से अधिक भुगतान लिया जाता था, जबकि उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन मिलता था। उनका कहना है कि चढ़ावा चोरी मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, फिर भी उन्हें अचानक नौकरी से हटा दिया गया। दूसरी ओर, ट्रस्ट और SBI का कहना है कि नई व्यवस्था केवल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
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चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अभी जारी है और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जा रहे हैं।
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