किसानों की आवाज आखिर इतनी बुलंद कैसे हुई कि दिल्ली की सत्ता भी उसे नजरअंदाज नहीं कर सकी ? चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का नाम भारतीय किसान आंदोलन के इतिहास में आज भी बेहद खास माना जाता है।

UP News : आज 6 अक्टूबर है। यह दिन भारतीय किसान आंदोलन के इतिहास में एक ऐसे व्यक्तित्व को याद करने का अवसर है, जिसकी आवाज खेतों से निकलकर देश की राजधानी तक पहुंची। यह दिन किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जन्म जयंती का दिन है। सिसौली की धरती से उठकर देश के करोड़ों किसानों की आवाज बनने वाले चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा किसान, खेती और ग्रामीण समाज के सवालों को समर्पित किया। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव के रहने वाले थे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पहचान बनाने से पहले वे बालियान खाप के मुखिया के रूप में ग्रामीण समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखते थे। लेकिन उनका व्यक्तित्व किसी एक गांव, खाप या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। किसान के सवालों को लेकर उनका संघर्ष धीरे-धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर पूरे देश का विषय बन गया। टिकैत जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने किसान की समस्याओं को केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने खेत में काम करने वाले किसान की भाषा में उसकी परेशानियों को समझा और उसी भाषा में सरकारों के सामने अपनी बात रखी। उनके लिए किसान केवल चुनाव के समय याद किया जाने वाला मतदाता नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था की बुनियाद था। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन ने किसानों के अनेक मुद्दों को मजबूती से उठाया। गन्ने का उचित मूल्य, बिजली और पानी की दरें, किसानों के बकाये का भुगतान, कृषि लागत और खेती से जुड़े अन्य सवाल उनके आंदोलनों के केंद्र में रहे। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसान की समस्याओं को केवल कागजों पर लिखे आश्वासनों से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकारों को किसान के बीच जाना होगा और उसकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना होगा। उनका आंदोलन केवल मांगों की सूची नहीं था। उसके पीछे यह विचार था कि जिस किसान के श्रम से देश का अन्न भंडार भरता है, उसे अपनी मेहनत का सम्मान और उसकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के किसान आंदोलनों की चर्चा होती है तो वर्ष 1988 का दिल्ली का बोट क्लब किसान आंदोलन विशेष रूप से याद किया जाता है। बड़ी संख्या में किसान दिल्ली पहुंचे और राजधानी में अपनी मांगों को बुलंद आवाज के साथ सामने रखा। उस समय यह आंदोलन इस बात का प्रतीक बना कि यदि किसान संगठित होकर अपने अधिकारों की आवाज उठाए तो उसकी आवाज सत्ता के सबसे बड़े केंद्र तक पहुंच सकती है। बोट क्लब का वह आंदोलन भारतीय किसान आंदोलनों के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया। टिकैत जी ने किसानों को यह भरोसा दिलाया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी बात रखना उनका अधिकार है। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी सहजता थी। वे किसान से किसान की तरह बात करते थे। उनकी भाषा में न राजनीतिक आडंबर था और न ही किसी तरह की कृत्रिमता। वे गांव की चौपाल से निकले नेता थे और गांव की चौपाल की ही भाषा में किसानों के दुख-दर्द को समझते थे। शायद यही कारण था कि उनके साथ बड़ी संख्या में किसान सहजता से जुड़ते चले गए। उन्होंने किसान को यह एहसास कराया कि उसकी अपनी आवाज भी ताकत रखती है और लोकतंत्र में उसकी बात को सुना जाना चाहिए। UP News
आज चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर उन्हें याद करना केवल एक किसान नेता को श्रद्धांजलि देना नहीं है। यह उस विचार को याद करना है जिसमें किसान को देश की व्यवस्था के केंद्र में रखने की बात थी। समय बदल गया है। खेती के तरीके बदल रहे हैं। कृषि की लागत बढ़ी है। बाजार की प्रकृति बदली है। तकनीक खेती के क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रही है। किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे समय में टिकैत जी के संघर्ष को याद करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उन्होंने हमेशा किसान की आर्थिक मजबूती और सम्मान को प्राथमिकता दी। आज भी किसान के सामने उपज का उचित मूल्य, लागत, सिंचाई, बिजली, कर्ज, बाजार और समय पर भुगतान जैसे अनेक सवाल मौजूद हैं। इन सवालों का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब किसान की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर नीतियां बनाई जाएं। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान आंदोलन को केवल विरोध का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि उसे किसानों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बनाया। उन्होंने दिखाया कि जब किसान अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट होता है तो उसकी आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। उनका जीवन यह संदेश देता है कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ केवल पद प्राप्त करना नहीं है। नेतृत्व तब सार्थक होता है, जब नेता अपने समाज के सुख-दुख में उसके साथ खड़ा हो और आवश्यकता पड़ने पर उसके अधिकारों के लिए संघर्ष करे। टिकैत जी ने यही किया। उन्होंने किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझा और उनके सवालों को सत्ता के सामने रखा। UP News
आज की नई पीढ़ी के लिए चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं होना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि भारत की आर्थिक और सामाजिक संरचना में किसान की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। शहरों की चमक और आधुनिक अर्थव्यवस्था के बीच अक्सर खेत और किसान पीछे छूटते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन देश की खाद्य सुरक्षा आज भी किसान के श्रम पर निर्भर है। टिकैत जी का संघर्ष हमें यह याद दिलाता है कि किसान की समृद्धि के बिना गांव मजबूत नहीं हो सकते और गांव मजबूत हुए बिना भारत की समृद्धि अधूरी रहेगी। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम किसान के सवालों को केवल राजनीतिक बहस का विषय न मानकर उन्हें देश के विकास का मूल प्रश्न समझें। सिसौली से उठी वह आवाज आज भी किसानों के संघर्षों में सुनाई देती है। वह आवाज हमें याद दिलाती है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने जीवन से यह साबित किया कि एक साधारण किसान नेता भी यदि ईमानदारी, संघर्ष और संगठन की ताकत के साथ खड़ा हो जाए तो उसकी आवाज देश की सत्ता के गलियारों तक पहुंच सकती है। आज उनकी जन्म जयंती पर हम उस महान किसान नेता को नमन करते हैं, जिसने किसानों को अपनी ताकत पहचानने का साहस दिया। UP News
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को विनम्र श्रद्धांजलि।
लेखक - वीरेश तिवारी
सदस्य, शिकायत निवारण समिति, नोएडा अथॉरिटी
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