चित्रकूट के बेलरी गांव में सड़क नहीं होने से मरीज को ग्रामीणों ने दो किलोमीटर तक चारपाई पर ढोया। 200 मीटर का कच्चा रास्ता बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत।
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UP News : उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच चित्रकूट से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। यहां आकांक्षी ब्लॉक रामनगर के बेलरी गांव में सड़क की बदहाली के कारण एक मरीज को ग्रामीणों ने करीब दो किलोमीटर तक चारपाई पर कंधों के सहारे ढोया। ऑपरेशन के बाद मरीज को दोबारा जांच के लिए प्रयागराज ले जाना था, लेकिन गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। मामला चित्रकूट जिले की ग्राम पंचायत रामपुर के मजरा बेलरी का है। गांव निवासी कमलेश प्रसाद 2 अक्टूबर 2026 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में उनके पेट में गंभीर अंदरूनी चोट आई थी और आंत फट गई थी। इसके बाद 4 अक्टूबर को प्रयागराज स्थित स्वरूपरानी नेहरू मेडिकल कॉलेज में उनका ऑपरेशन किया गया। 23 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिजन उन्हें चारपाई पर लिटाकर गांव लेकर आए थे। करीब एक सप्ताह बाद उन्हें दोबारा चिकित्सकीय जांच के लिए प्रयागराज जाना था। गांव से मुख्य सड़क तक कोई सुगम रास्ता नहीं होने के कारण चार ग्रामीणों ने मरीज को चारपाई पर उठाया और करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले गए। मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद ही वाहन से अस्पताल जाने की व्यवस्था हो सकी।
ग्रामीण सुधीर निगम के मुताबिक, गांव तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबा रास्ता है। इस मार्ग पर विधायक निधि से सड़क का निर्माण कराया गया है। नाले पर रपटा भी बनाया गया है और रपटे से गांव की ओर सड़क मौजूद है, लेकिन बीच में करीब 200 मीटर का हिस्सा आज भी कच्चा पड़ा है। बारिश के दौरान इस हिस्से में कीचड़ भर जाता है, जिससे लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। वाहनों का आवागमन बाधित होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी होती है। ग्राम प्रधान रामकेश ने बताया कि गुंता बांध का पानी आने से रास्ता खराब हुआ है। इसके निर्माण का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। UP News
बेलरी गांव की स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव अजय राज त्रिपाठी ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चित्रकूट जैसे आकांक्षी जनपद में किसी मरीज को इलाज के लिए दो किलोमीटर तक चारपाई पर ढोकर ले जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बेलरी गांव की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला रही है। जब गांव तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता ही नहीं है तो आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल कैसे पहुंचाया जाएगा? अजय राज त्रिपाठी ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर तत्काल संपर्क मार्ग का निर्माण कराने की मांग की है। UP News
ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की समस्या केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की परेशानी है। बरसात के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है। किसी के बीमार पड़ने या आपात स्थिति में वाहन की जरूरत होने पर ग्रामीणों को इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराने तथा अधूरे संपर्क मार्ग का प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कराने की मांग की है। बेलरी गांव की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है, ताकि भविष्य में किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई पर कंधों के सहारे न ले जाना पड़े। UP News
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