चित्रकूट के दीपदान मेले में श्रद्धालुओं की पदयात्रा इस बार कुछ अलग ही रंग में नजर आ रही है। रास्ते में सजे सांस्कृतिक मंच, पारंपरिक लोक कलाएं और कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। आखिर क्या है इस खास आयोजन की पूरी तैयारी?

UP News : प्रभु श्रीराम के दर्शन और दीपदान की आस्था लेकर चित्रकूट पहुंच रहे श्रद्धालुओं का रास्ता इन दिनों बुंदेली लोक संस्कृति के रंगों से गुलजार है। लंबी पदयात्रा के दौरान कहीं आल्हा की वीरगाथाएं सुनाई दे रही हैं तो कहीं राई और दीवारी नृत्य की थाप श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही है। दीपदान मेले में आने वाले 50 हजार से अधिक पदयात्रियों के स्वागत और मनोरंजन के लिए मार्ग पर नौ सांस्कृतिक मंच बनाए गए हैं, जहां करीब 50 कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध रहे हैं। बांदा, महोबा, हमीरपुर, छतरपुर और कानपुर समेत आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल चित्रकूट पहुंचते हैं। कई किलोमीटर की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को थकान से राहत देने और उनके सफर को यादगार बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है।
पदयात्रा मार्ग पर बनाए गए नौ मंचों पर नौ सांस्कृतिक दलों के कलाकार बुंदेलखंड की पारंपरिक लोक कलाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी मंच पर आल्हा गायन के जरिए वीरता और शौर्य की गाथाएं सुनाई जा रही हैं तो किसी मंच पर राई और दीवारी नृत्य की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं का मन मोह रही हैं। इसके अलावा पाई-डंडा नृत्य, तंबूरा नृत्य और कोल्हाई गायन-नृत्य भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकगीतों के माध्यम से बुंदेली संस्कृति की खूबसूरती को प्रस्तुत कर रहे हैं।
दीपदान मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की लंबी पदयात्रा को सुगम और यादगार बनाने के लिए करीब 50 कलाकार अलग-अलग मंचों पर प्रस्तुतियां दे रहे हैं। रास्ते में सांस्कृतिक कार्यक्रम देखकर श्रद्धालु कुछ देर रुकते हैं और लोकगीतों तथा नृत्य का आनंद लेते हैं। इससे उन्हें यात्रा के दौरान मनोरंजन के साथ विश्राम का अवसर भी मिल रहा है।
चित्रकूट का दीपदान मेला धार्मिक आस्था के साथ बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी माध्यम बन रहा है। पदयात्रा मार्ग पर आयोजित कार्यक्रमों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। आल्हा, राई, दीवारी और अन्य पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से परिचित करा रही हैं। इस तरह दीपदान मेले में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ बुंदेली लोक संस्कृति का भी अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
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