चित्रकूट के गुंता बांध में पानी भरने से किसानों की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। आखिर प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला और अपनी मांगों को लेकर उन्होंने जल सत्याग्रह का रास्ता क्यों अपनाया ?

UP News : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामपुर के मजरा बेलरी में गुंता बांध परियोजना से प्रभावित किसान सोमवार से झुहरी नदी के पास धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप है कि बांध में पानी भरने से उनकी सैकड़ों बीघे कृषि भूमि डूब गई है, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे दिन-रात नदी किनारे आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का कहना है कि गुंता बांध में पानी भरने से उनकी खेती योग्य जमीन जलमग्न हो गई है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने रसिन बांध परियोजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गुंता बांध के प्रभावित किसानों की अनदेखी की जा रही है। UP News
ग्राम प्रधान रामपुर रामकेश यादव ने बताया कि बेलरी के किसानों की सैकड़ों बीघे जमीन बांध के पानी में डूब चुकी है। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को न तो मुआवजा मिला और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। बराछी गांव के किसान केशव चंद्र ने बताया कि उनकी 17 बीघे जमीन बांध के पानी में डूब गई है। खेती प्रभावित होने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। UP News
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार भास्कर ने कहा कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर शासन और प्रशासन के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधि भी इस मामले में रुचि नहीं ले रहे हैं। मजबूर होकर किसानों को जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा है। UP News
आंदोलन कर रहे किसानों ने गुंता बांध परियोजना में अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा देने और अतिवृष्टि व जलभराव से बर्बाद हुई फसलों की क्षतिपूर्ति की मांग की है। इसके अलावा रामपुर-बेलरी संपर्क मार्ग पर बांध का गेट खुलवाकर आवागमन सुचारु कराने की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि अनुसूचित जाति बस्ती के लिए पक्का संपर्क मार्ग बनाया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो वहां रहने वाले ग्रामीणों को दूसरी जगह विस्थापित किया जाए। UP News
मामले की जानकारी मिलने पर नायब तहसीलदार पारुल सिंह परिहार गांव पहुंचीं और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने मौके से ही सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से बातचीत की। अधिकारियों के अनुसार, गुंता बांध का गेट निर्धारित मानकों और शासन की अनुमति के अनुसार खोला जा सकता है। नायब तहसीलदार ने बताया कि मंगलवार को सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेगी। ग्रामीणों को जल्द समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, किसानों ने मांगें पूरी होने तक जल सत्याग्रह जारी रखने का ऐलान किया है। UP News
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