चित्रकूट के बेलरी गांव में किसानों का जल सत्याग्रह लगातार जारी है। इस बीच धरना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसकी ग्रामीणों ने जमकर सराहना की। आखिर किसानों की कौन-सी मांगें अब भी अधूरी हैं?

UP News : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में किसानों का अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी है। बेलरी गांव में चल रहे इस आंदोलन के बीच मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों को धरना स्थल तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। गांव तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण अधिकारियों को अपनी सरकारी गाड़ियां सड़क पर ही छोड़नी पड़ीं। इसके बाद SDM मऊ राम ऋषि रमन ने एक ग्रामीण की बाइक खुद चलाई और उस पर सवार होकर गांव पहुंचे। उनके पीछे सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुवेश कुमार सिंह बैठे थे। SDM की इस पहल को देखकर ग्रामीणों ने उनकी संवेदनशीलता और प्रयास की सराहना की।
मंगलवार को SDM मऊ राम ऋषि रमन के साथ सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुवेश कुमार सिंह, अवर अभियंता विवेक कुमार और सहायक अभियंता अभिषेक कुमार बेलरी गांव पहुंचे। झुरही नदी के पास धरना दे रहे किसानों से अधिकारियों ने मुलाकात की और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। धरना स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकारी वाहनों को रास्ते में छोड़ने के बाद अधिकारियों ने पैदल नदी पार की। इसके बाद SDM ने एक ग्रामीण की बाइक की कमान संभाली और खुद बाइक चलाकर गांव पहुंचे। उनके पीछे सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता बैठे दिखाई दिए। अधिकारियों के इस प्रयास की ग्रामीणों ने सराहना की।
किसानों से बातचीत के दौरान SDM मऊ ने उनकी समस्याओं को सुना और कुशल का पुरवा से बराछी होते हुए बेलरी गांव तक वैकल्पिक संपर्क मार्ग बनवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों की परेशानियों के समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहा है। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि अब केवल मौखिक आश्वासन से उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। किसानों की मांग है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से लिखित कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों के मुताबिक, गुंता बांध परियोजना के निर्माण के कारण बेलरी गांव का संपर्क मार्ग प्रभावित हुआ है। गांव तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों गांव के एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई पर लिटाकर ले जाना पड़ा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग की समस्या के कारण मरीजों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
बेलरी गांव के किसानों की प्रमुख मांगों में अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा, बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा और रामपुर-बेलरी संपर्क मार्ग को दोबारा बहाल करना शामिल है। किसानों का आरोप है कि बांध परियोजना के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार भास्कर ने कहा कि प्रशासन की ओर से पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उन पर प्रभावी ढंग से अमल नहीं हुआ। बांध निर्माण के इतने साल बाद भी किसान मुआवजे से वंचित हैं।
किसानों ने साफ कर दिया है कि इस बार वे केवल आश्वासन के भरोसे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि जमीन और फसल के मुआवजे के साथ संपर्क मार्ग की बहाली को लेकर ठोस निर्णय लिया जाए। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक बेलरी गांव में अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह जारी रहेगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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