चित्रकूट का ऐतिहासिक गधा मेला एक बार फिर अपने अनोखे आकर्षण को लेकर सुर्खियों में है। इस बार यहां कुछ ऐसे नाम और कीमतें चर्चा में हैं, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। आखिर क्या है इस मेले की खास परंपरा? जानिए पूरी खबर।

UP News : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में लगने वाला ऐतिहासिक गधा मेला एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश का यह अनोखा ऐतिहासिक गधा मेला हर साल दीपावली अमावस्या के समय मंदाकिनी नदी के तट पर लगाया जाता है। दीपावली अमावस्या मेले के दौरान मंदाकिनी नदी के तट पर लगने वाले इस अनोखे बाजार में देश के कई राज्यों के साथ नेपाल से भी व्यापारी पहुंचेंगे। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले की खास बात यह है कि यहां गधों के नाम बॉलीवुड सितारों के नाम पर रखे जाते हैं। इस बार शाहरुख, सलमान, अक्षय, रणवीर और कैटरीना जैसे नाम वाले गधे लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। धनतेरस से शुरू होने वाले पांच दिवसीय मेले में गधों और खच्चरों की खरीद-फरोख्त होगी। यहां अच्छी नस्ल के गधों की कीमत पांच लाख रुपये तक पहुंच जाती है। मेले में करीब 300 व्यापारियों के पहुंचने की उम्मीद है।
चित्रकूट के इस अनोखे मेले की सबसे दिलचस्प परंपरा गधों को फिल्मी सितारों और चर्चित नेताओं के नाम देना है। व्यापारी अपने गधों को आकर्षक नाम देकर खरीदारों का ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं। इस बार शाहरुख, सलमान, अक्षय, रणवीर और कैटरीना जैसे नाम चर्चा में रहेंगे। नाम भले ही फिल्मी सितारों जैसे हों, लेकिन गधों की असली कीमत उनकी नस्ल, शारीरिक बनावट, ताकत, चाल और काम करने की क्षमता के आधार पर तय होती है। खरीदार भी खरीदारी से पहले इन खूबियों को परखते हैं।
इस मेले में गधों की कीमत उनकी गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य गधों की कीमत करीब एक हजार रुपये से शुरू होकर दो लाख रुपये तक पहुंचती है। वहीं, अच्छी नस्ल और बेहतर शारीरिक क्षमता वाले गधों की बोली पांच लाख रुपये तक लग सकती है। मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड से व्यापारी पहुंचते हैं। नेपाल से भी व्यापारियों के आने की संभावना रहती है। पांच दिनों तक चलने वाले इस बाजार में गधों और खच्चरों की खरीद-फरोख्त होती है।
एक समय था जब निर्माण कार्यों, सामान ढोने और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन के लिए गधों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब ई-रिक्शा, लोडर और दूसरे व्यावसायिक वाहनों का चलन बढ़ने से गधों की मांग प्रभावित हुई है। पशुपालकों के मुताबिक, आधुनिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण गधों से जुड़े काम के अवसर कम हो रहे हैं। दूसरी तरफ उनके चारे, देखभाल और रखरखाव पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इस पारंपरिक कारोबार से जुड़े लोगों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इसके बावजूद चित्रकूट का ऐतिहासिक गधा मेला अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। बॉलीवुड सितारों के नाम वाले गधे, लाखों रुपये तक पहुंचने वाली कीमतें और देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले व्यापारी इस मेले को खास बनाते हैं।
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