चित्रकूट में दीपावली अमावस्या मेले को लेकर रामघाट को भव्य रूप देने की तैयारियां तेज हैं। आखिर बाढ़ के बाद अब तक क्या-क्या नहीं बदल पाया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

दीपावली मेले के लिए चमक रहा चित्रकूट का रामघाट, बाढ़ से टूटे मठ-मंदिरों को अब भी मदद का इंतजार
UP News : चित्रकूट में दीपावली अमावस्या मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए धर्मनगरी को अयोध्या की तर्ज पर सजाया जा रहा है। प्रशासन रामघाट की सजावट और सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटा है, लेकिन मंदाकिनी नदी की बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए मठ-मंदिरों की हालत अब भी खराब है। कहीं मंदिरों के मुख्य द्वार टूटे पड़े हैं तो कहीं भवनों की दीवारों में गहरी दरारें हैं। संतों का कहना है कि बाढ़ से लाखों रुपये का नुकसान होने के बावजूद अब तक उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिली है। रामघाट स्थित भरत मंदिर को बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा था। मंदिर का कार्यालय, कथा स्थल, मुख्य द्वार और भवन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बनाए गए कमरे भी टूट गए हैं। मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास महाराज के मुताबिक, बाढ़ से 20 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान मंदिर की क्षतिग्रस्त स्थिति दिखाकर आर्थिक सहायता मांगी गई थी, लेकिन मदद मिलने के बजाय जर्जर भवन को गिराने का नोटिस मिल गया।
बाढ़ की चपेट में आने से निर्मोही अखाड़े को भी भारी क्षति हुई है। महंत भरतदास महाराज ने बताया कि बाढ़ में 300 क्विंटल गेहूं, 100 क्विंटल चावल और 50 क्विंटल चना बह गया। इसके अलावा अखाड़े के भवनों में जगह-जगह दरारें आ गई हैं। उन्होंने बताया कि अखाड़े में प्रतिदिन 200 से 300 साधु-संतों और जरूरतमंदों के भोजन की व्यवस्था होती है। दीपावली मेले के दौरान यहां 100 से 200 लोगों के ठहरने का इंतजाम भी किया जाता है। इसके बावजूद बाढ़ से हुए नुकसान के बाद अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। UP News
क्षतिग्रस्त मठ-मंदिरों के पुनर्निर्माण को लेकर SDM कर्वी अजय यादव ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत जरूरी निर्माण कार्य कराए जाएंगे। भविष्य में बाढ़ से दोबारा नुकसान न हो, इसके लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे। UP News
मंदाकिनी नदी में बाढ़ आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामघाट पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। उन्होंने क्षतिग्रस्त घाटों और आसपास के इलाकों का जायजा लेकर अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने और प्रभावित स्थलों पर जरूरी काम कराने के निर्देश दिए थे। फिलहाल दीपावली मेले के लिए रामघाट को सजाने और श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने का काम जारी है। दूसरी ओर, बाढ़ से प्रभावित मठ-मंदिरों के संत अब भी आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। UP News
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