चित्रकूट में अप्रैल से सितंबर तक सर्पदंश से 40 मौतें दर्ज हुईं। जानिए सांप काटने के मामले, एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता और स्वास्थ्य विभाग की सलाह।

UP News : जनपद में सर्पदंश के बढ़ते मामलों ने लोगों को चिन्ता में डाल दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक अप्रैल से 30 सितंबर तक जिले में सर्पदंश से कुल 40 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें 34 मौतें पोस्टमार्टम में दर्ज हुईं, जबकि छह मरीजों की मौत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, छह माह में सर्पदंश के कुल मामलों में 335 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, जबकि 144 मामले अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक से 30 सितंबर तक जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में सर्पदंश के 154 मामले दर्ज किए गए। इनमें जिला अस्पताल में 118, मानिकपुर में 12, पहाड़ी और राजापुर में सात-सात, रामनगर में पांच, शिवरामपुर में तीन और मऊ में दो मामले सामने आए। एक जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में सांपों की तीन हजार प्रजातियां हैं, जिसमें 300 सांपों की प्रजातियां अपने देश में पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेले बुंदेलखंड में सांपों की 30 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें अकेले चित्रकूट में करैत, कोबरा, रसेल वाइपर और धामन जैसे बेहद खतरनाक सांप पाए जाते हैं।
जानकार बताते हैं कि सांप के काटने के स्थान पर सूजन या दर्द होता है। पीड़ित को चक्कर और उल्टी भी आ सकती है। जहर के प्रभाव के चलते सांस लेने में तकलीफ और खून बहना या पेशाब में खून आ सकता है। हड़बड़ाहट में मरीज को बेहोशी भी आ सकती है। UP News
सर्पदंश के साथ अंधविश्वास भी लोगों की जान ले लेता है। अक्सर लोग पहले झाड़फूंक के फेर में पड़ते हैं और जबतक अस्पताल ले जाते हैं, पीड़ित की मौत हो जाती है। क्षेत्र में सर्पदंश को झाड़ने की बात करने वालों की ठीकठाक संख्या है। ये मरीज को झाड़फूंक कर ठीक करने का दावा करते हैं लेकिन इस चक्कर में अक्सर कई लोगों की जान चली जाती है। चिकित्सकों ने कहा कि जरूरी है कि लोग झाड़ फूंक की बजाए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराएं। UP News
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक से 30 सितंबर तक जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में सर्पदंश के कुल 144 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक 118 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, जबकि मानिकपुर में 12, पहाड़ी और राजापुर में सात-सात, रामनगर में पांच, शिवरामपुर में तीन और मऊ में दो मामले सामने आए। UP News
जिले में सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास 3081 वायल एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. दयाशंकर ने बताया कि विभिन्न सीएचसी पर दवा का स्टॉक रखा गया है, जबकि शेष दवा मुख्य ड्रग वेयरहाउस में सुरक्षित है। शिवरामपुर सीएचसी में 100, मऊ में 105, रामनगर में 103, पहाड़ी में 150 और मानिकपुर में 190 वायल उपलब्ध हैं। वहीं सभी पीएचसी पर कम से कम 10 वायल रखी जाती हैं। एक पूरा डोज 10 वायल का होता है। एक्सपायरी से बचाने के लिए पीएचसी पर सीमित स्टॉक रखा जाता है।
सर्पदंश के अलावा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 30 सितंबर तक जिले में कुत्ते, बंदर, बिल्ली, सियार समेत अन्य घरेलू और वन्य जीवों के काटने के कुल 12,947 मामले दर्ज किए गए। जो एक चिंता का भी विषय है। UP News
“सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। सांप के काटने की आशंका होने पर भी बिना देर किए मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल या सीएचसी-पीएचसी लेकर जाएं। जिले के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसके अलावा एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) भी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है। समय पर अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना बेहद जरूरी है।” UP News
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