मध्य प्रदेश में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में भी गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। मंदाकिनी नदी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है।

Chetna Manch | Uttar Pradesh : मध्य प्रदेश में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में भी गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। मंदाकिनी नदी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और रामघाट सहित आसपास के निचले इलाकों में पानी तेजी से बढ़ा है। मंगलवार सुबह रामघाट की कई दुकानें और मकान पानी की चपेट में आ गए। कामतानाथ जाने वाला मार्ग भी प्रभावित हुआ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दे रहे हैं। लोगों से कहा जा रहा है कि वे घर और दुकानें बंद कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं तथा नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचें।
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चित्रकूट में बाढ़ की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए मध्य प्रदेश में हुई बारिश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चित्रकूट क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप ऐसा है कि मध्य प्रदेश के पहाड़ी और जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश का सीधा असर मंदाकिनी के जलस्तर पर पड़ता है। पिछले दिनों भी मंदाकिनी ने अत्यंत विकराल रूप दिखाया था। नदी का जलस्तर ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था और रामघाट सहित कई इलाके जलमग्न हो गए थे। प्रशासन को राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा था। अब दोबारा नदी के उफान पर आने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। सोमवार शाम जलस्तर कुछ नीचे आया था, लेकिन मंगलवार सुबह अचानक पानी तेजी से बढ़ा और कुछ ही समय में खतरे के निशान को पार कर गया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब 9 बजे मंदाकिनी का जलस्तर 129.750 मीटर तक पहुंच गया था।
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मंदाकिनी का पानी बढ़ने का सबसे ज्यादा असर रामघाट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। यहां नदी का पानी सड़कों और आसपास के रिहायशी तथा कारोबारी इलाकों तक पहुंच गया है। रामघाट की कई दुकानें और मकान पानी में डूब गए हैं। स्थानीय लोगों के सामने एक बार फिर अपना सामान सुरक्षित करने और परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पिछले दिनों आई बाढ़ में भी चित्रकूट में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। कई दुकानें प्रभावित हुईं, संपर्क मार्ग बाधित हुए और राहत-बचाव के लिए एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमों को सक्रिय करना पड़ा था।
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मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस और राहत दल संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की तरफ भी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण हालात चिंताजनक हैं। मऊकामगढ़ ब्रिज के आसपास नदी का पानी बढ़ने के बाद पुल पर भी खतरे की आशंका जताई गई है। एहतियात के तौर पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सतना पुलिस के जवानों की पेट्रोलिंग की जा रही है।
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चित्रकूट में पिछले दिनों आई बाढ़ ने प्रशासन और स्थानीय लोगों को झकझोर दिया था। लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी का जलस्तर इस सदी के सबसे ऊंचे स्तरों में पहुंच गया था। कई संपर्क मार्ग बंद करने पड़े थे और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया था। मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति इतनी गंभीर हुई थी कि रामघाट और आसपास के इलाके जलमग्न हो गए थे। कई स्थानों पर सड़कें पानी में बदल गई थीं और लोगों को निकालने के लिए बचाव दलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
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चित्रकूट ही नहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। वाराणसी में गंगा का पानी बढ़ने से घाटों पर बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। मणिकर्णिका घाट भी पानी की चपेट में आ गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं। इससे अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इससे पहले भी गंगा का पानी बढ़ने पर मणिकर्णिका घाट के प्लेटफॉर्म डूबने के बाद ऊपरी हिस्सों में अंतिम संस्कार किए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं। वाराणसी में गंगा के साथ-साथ अन्य नदियों के जलस्तर पर भी प्रशासन की नजर है। लगातार बारिश और नदियों में बढ़ते पानी के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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राजधानी लखनऊ में भी मंगलवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। तेज बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के चलते लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो रही है।
यानी उत्तर प्रदेश में इस समय बारिश केवल शहरी जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि कई इलाकों में नदियों के उफान के कारण बाढ़ का खतरा भी बढ़ रहा है।
मंदाकिनी के दोबारा उफान पर आने के बाद प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की ओर से लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि वे नदी के आसपास जाने, पानी के तेज बहाव को पार करने या जलभराव वाले रास्तों पर जोखिम लेने से बचें। जिन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
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चित्रकूट की मंदाकिनी से लेकर प्रयागराज की गंगा-यमुना और वाराणसी की गंगा तक नदियों का बढ़ता जलस्तर उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले घंटों में चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी और महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा है जो नदी के किनारे या निचले भूभाग में स्थित हैं। फिलहाल चित्रकूट में सबसे बड़ी चिंता मंदाकिनी के तेजी से बढ़ते जलस्तर को लेकर है। मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश का पानी यदि इसी तरह नदी में पहुंचता रहा तो उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की चेतावनी को हल्के में न लेकर नदी और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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