मुख्यमंत्री की मौजूदगी को लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों को तेज कर दिया है। गोरखपुर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक अभी से त्योहार की रौनक और उत्सव का माहौल साफ झलकने लगा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर गोरखपुर की होली इस बार खास रहने वाली है। उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक नक्शे पर गोरखपुर की होली हमेशा से खास पहचान रखती है, और इस बार यह रंगोत्सव और भी यादगार बनने जा रहा है। रंग, परंपरा और लोकआस्था के इस महापर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2 मार्च को होलिका दहन की रात तथा 4 मार्च को होलिकोत्सव के दिन निकलने वाली शहर की दो प्रमुख शोभायात्राओं में सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री की मौजूदगी को लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों को तेज कर दिया है। गोरखपुर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक अभी से त्योहार की रौनक और उत्सव का माहौल साफ झलकने लगा है।
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री 2 मार्च की शाम गोरखपुर के पांडेयहाता क्षेत्र से निकलने वाली भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा में शामिल होंगे। होलिका दहन की रात यह शोभायात्रा शहर में श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान मुख्यमंत्री श्रद्धालुओं का अभिवादन करेंगे और एकता, सद्भाव व सामाजिक समरसता का संदेश देंगे। इसके बाद 4 मार्च की सुबह गोरखपुर के घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में भी मुख्यमंत्री की मौजूदगी तय है। परंपरा के अनुसार वे भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे। मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर नागरिकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं भी देंगे।
रंगपर्व के मद्देनजर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता पर रखा है। शोभायात्राओं के मार्गों पर यातायात डायवर्जन, पर्याप्त पुलिस बल, मेडिकल सहायता, फायर सेफ्टी और साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन का अनुमान है कि दोनों आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल होंगे, इसलिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।
गोरखपुर की भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा का इतिहास भी खास है। इसकी शुरुआत 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख के प्रयासों से मानी जाती है। समय के साथ यह आयोजन गोरक्षपीठ के संरक्षण में पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान बन गया। इस परंपरा की खास बात यह रही है कि यह उत्सव छुआछूत और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर लोककल्याण और समरसता की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश देता है, जो आज भी शोभायात्राओं के स्वरूप में साफ दिखाई देता है। UP News