दिव्यांगजनों के लिए योगी सरकार का मास्टरप्लान, एक ही छत के नीचे मिलेगी हर सुविधा
भारत
चेतना मंच
14 Oct 2025 04:07 PM
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी मंडल मुख्यालयों पर अत्याधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन केंद्रों को ऐसी जगह विकसित किया जाए जहां दिव्यांगजन को चिकित्सकीय, शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक सहायता एक ही स्थान पर सुलभ हो। UP News
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा, "हम सेवा, संवेदना और सम्मान के साथ दिव्यांगजनों के आत्मनिर्भर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
मॉडल केंद्रों की तर्ज पर होगा विस्तार
फिलहाल प्रदेश के 37 जिलों में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं जिनमें से 11 केंद्र मंडल मुख्यालयों पर स्थित हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन मौजूदा केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। वहीं, जिन जिलों में ये केंद्र नहीं हैं, वहां इन्हें स्थानीय जिला अस्पताल या सरकारी मेडिकल संस्थानों के परिसर में प्राथमिकता से स्थापित किया जाए। यदि पर्याप्त स्थान न हो तो अलग भवन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सभी जरूरी सेवाएं एक ही छत के नीचे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि इन पुनर्वास केंद्रों में निम्न सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इन सेवाओं में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श. ऑर्थोटिक व प्रॉस्थेटिक सेवाएं शामिल है। साथ ही, हर केंद्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो, जैसे कि फिजियोथेरेपिस्ट, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, ऑर्थोटिस्ट, प्रॉस्थेटिस्ट, स्पीच थैरेपिस्ट और काउंसलर।
डिजिटल सुविधाओं पर दिया जा रहा खास जोर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रों में तकनीकी संसाधनों को मजबूत किया जाए और दिव्यांगजनों के लिए डिजिटल पंजीकरण, तकनीकी प्रशिक्षण और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं भी शुरू की जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सेवाओं की गुणवत्ता पर सतत निगरानी हो सके। बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि प्रत्येक केंद्र का संचालन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति का पात्र नहीं, बल्कि समाज के योगदानकारी और आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार की नीतियों का उद्देश्य है कि हर दिव्यांगजन को उसके अधिकार और अवसर दोनों समान रूप से मिलें।बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कुमार कश्यप समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। UP News