अब यह विवाद महज एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश में सामाजिक सम्मान, जनभावना, राजनीतिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। कई संगठनों ने साफ कहा है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो उत्तर प्रदेश भर में विरोध का स्वर और तेज किया जाएगा।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा दिया है। इस बयान के सामने आते ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हिंदू संगठन खुलकर विरोध में उतर आए हैं और माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। कहीं प्रदर्शन हो रहे हैं, कहीं प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, तो कहीं आरोपी मौलाना के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। इसी बीच, मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ उत्तर प्रदेश के 84 थानों में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब यह विवाद महज एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश में सामाजिक सम्मान, जनभावना, राजनीतिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। कई संगठनों ने साफ कहा है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो उत्तर प्रदेश भर में विरोध का स्वर और तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर हुई कथित टिप्पणी के विरोध में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। हिंदू संगठनों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति के परिवार, खासकर मां के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में यह मामला तेजी से जनभावना से जुड़ गया है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक गरिमा पर हमला सभ्य समाज की मर्यादा के खिलाफ है। इसी कारण उत्तर प्रदेश में इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से देखा जा रहा है।
विवाद के केंद्र में आए मौलाना का पूरा नाम अब्दुल्ला सलीम कमर चतुर्वेदी कासमी बताया जाता है। वह एक इस्लामी वक्ता के तौर पर जाने जाते हैं और बिहार की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने दारुल उलूम देवबंद से इस्लामी शिक्षा प्राप्त की है। साथ ही संस्कृत व्याकरण का भी अध्ययन किया है। यही कारण है कि उनके भाषणों में कई बार धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ सुनने को मिलते रहे हैं।
हालांकि, अब उनकी पहचान एक धार्मिक वक्ता से अधिक उस शख्स के रूप में सामने आ रही है, जिसका नाम उत्तर प्रदेश में एक बड़े विवाद से जुड़ गया है। मुख्यमंत्री परिवार को लेकर कथित बयान के बाद उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मौलाना अब्दुल्ला सलीम का संबंध केवल धार्मिक मंचों तक सीमित नहीं रहा। वह पहले एआईएमआईएम से जुड़ाथाे। बाद में टिकट को लेकर असंतोष के बाद उन्होंने पार्टी से अलग रास्ता अपना लिया। इसके बाद वह जन सुराज पार्टी से भी जुड़े। हालांकि चुनावी राजनीति में उनकी दावेदारी को वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी उम्मीद की जा रही थी। अब उनका नाम उत्तर प्रदेश में एक ऐसे विवाद से जुड़ गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक हलचल पैदा कर दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे एक वीडियो के बाद यह विवाद गहराया। आरोप है कि मौलाना ने उत्तर प्रदेश में गौकशी को लेकर लागू सख्त कानूनों की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुजुर्ग मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसी कथित बयान के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध की लहर तेज हो गई। इस टिप्पणी को लेकर आम लोगों के साथ-साथ विभिन्न संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि विचारों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी की मां के सम्मान को ठेस पहुंचाना बेहद गंभीर और निंदनीय है।
मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ उत्तर प्रदेश के 84 थानों में एफआईआर दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यह मामला अब व्यापक कानूनी रूप ले चुका है। इतने बड़े स्तर पर मुकदमे दर्ज होने से पुलिस और प्रशासन पर भी कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यदि आरोपी पर जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। UP News