उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सख्त रुख जाहिर किया। राजधानी लखनऊ में आयोजित रोजगार महाकुंभ 2026 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

International Women's Day : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सख्त रुख जाहिर किया। राजधानी लखनऊ में आयोजित रोजगार महाकुंभ 2026 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति महिलाओं की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, उसके लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में बेटियों के अंदर आत्मविश्वास तेजी से बढ़ा है और वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। सरकार का प्रयास है कि उन्हें ऐसा सुरक्षित वातावरण मिले, जहां वे बिना किसी डर के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर बेटियों को उचित अवसर और सुरक्षा प्रदान की जाए तो वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाले अपराधों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई मनचला या अपराधी बेटियों के साथ अभद्रता करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से प्रदेश की लाखों बेटियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पढ़ाई तक परिवारों को सहयोग देना है। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी बेटी का जन्म होता है और उसका पंजीकरण कराया जाता है, उसके नाम से खाते में आर्थिक सहायता भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे परिवारों को बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर आर्थिक मदद मिलती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना का लाभ अब तक लगभग 27 लाख बेटियों तक पहुंच चुका है। इससे समाज में यह संदेश भी जा रहा है कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं हैं, बल्कि वे परिवार और समाज की ताकत हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या काफी कम थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश पुलिस में लगभग 10 हजार महिला कर्मचारी थीं, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 44 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस व्यवस्था में संवेदनशीलता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ी हैं, खासकर महिलाओं से जुड़े मामलों में।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से खास अपील की। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षा देना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब बेटियां शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगी तो समाज और देश दोनों मजबूत होंगे। सरकार का उद्देश्य यही है कि बेटियों को सुरक्षित माहौल, अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें। International Women's Day