नेता प्रतिपक्ष का अचानक सरकारी अस्पताल पहुंचना बना चर्चा का विषय

बताया जा रहा है कि सिद्धार्थनगर से लखनऊ जाते समय उनके हाथ में चोट लग गई थी, जिसके बाद उनका काफिला प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में रुका। लेकिन जैसे ही नेता प्रतिपक्ष इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं मिले।

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Mar 2026 09:34 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय रविवार को अचानक बस्ती जिले के कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंच गए। बताया जा रहा है कि सिद्धार्थनगर से लखनऊ जाते समय उनके हाथ में चोट लग गई थी, जिसके बाद उनका काफिला प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में रुका। लेकिन जैसे ही नेता प्रतिपक्ष इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक बड़े चेहरे के अचानक सरकारी अस्पताल पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में प्रभारी चिकित्साधिकारी मौके पर पहुंचे, उपचार की व्यवस्था कराई गई और मामले को संभालने की कोशिश हुई। हालांकि नेता प्रतिपक्ष के अस्पताल से रवाना होते ही पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक लापरवाही का रूप ले लिया और संबंधित चिकित्सक को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया गया।

इमरजेंसी में डॉक्टर न मिलने पर बढ़ी हलचल

मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय अपने गृह जनपद सिद्धार्थनगर से लखनऊ जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनके हाथ में चोट लग गई। बताया जा रहा है कि यह चोट रास्ते में वाहन के अचानक ब्रेक लगने से लगी, जिससे उनकी हथेली पर खरोंच आ गई और झटका भी लगा। इसके बाद उनका काफिला रविवार शाम करीब चार बजे बस्ती जिले के कप्तानगंज स्थित सीएचसी पहुंचा। काफिला अस्पताल परिसर में पहुंचते ही स्वास्थ्यकर्मियों में हलचल मच गई। नेता प्रतिपक्ष सीधे इमरजेंसी कक्ष की ओर बढ़े, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक मौजूद नहीं थे। उस समय इमरजेंसी में केवल फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय मौजूद बताए गए। सूत्रों के अनुसार, इमरजेंसी में जिस डॉक्टर की ड्यूटी लगी थी, उनका नाम डॉ. रवि कुमार सिंह बताया गया। नेता प्रतिपक्ष के अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलते ही सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्थिति संभाली। उन्होंने माता प्रसाद पांडेय का हालचाल जाना और उनके हाथ की जांच की। इसके बाद फार्मासिस्ट की मदद से घायल हाथ की ड्रेसिंग कराई गई और आवश्यक दवा उपलब्ध कराई गई। अस्पताल में करीब 15 मिनट रुकने के बाद नेता प्रतिपक्ष का काफिला लखनऊ के लिए रवाना हो गया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

नेता प्रतिपक्ष जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के अचानक अस्पताल पहुंचने पर इमरजेंसी में डॉक्टर का अनुपस्थित मिलना, उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के तुरंत बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया। साथ ही पूरे मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को भी भेज दी गई। सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि जिस चिकित्सक की इमरजेंसी ड्यूटी थी, उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

डॉ. रवि सिंह ने दी अपनी सफाई

इस मामले पर बस्ती के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सीएचसी कप्तानगंज पहुंचे थे, जहां उनका उपचार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस मामले में उनके पास किसी प्रकार की औपचारिक शिकायत नहीं आई है। वहीं, इमरजेंसी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए डॉ. रवि सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि वह लगातार 48 घंटे से ड्यूटी कर रहे थे। उनके मुताबिक, वह किसी आवश्यक कार्य से थोड़ी देर के लिए बाहर गए थे और इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष अस्पताल पहुंच गए। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने उनकी अनुपस्थिति को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए नोटिस जारी कर दिया है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

योगी सरकार का बड़ा फैसला, फ्लैट- प्लॉट खरीदारों को मिलेगी बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी विकास प्राधिकरण को आवंटन के बाद लोगों को अनिश्चितता में रखकर सालों तक चक्कर नहीं कटवाने दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश के आवास विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Mar 2026 09:16 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश में फ्लैट और प्लॉट खरीदने वाले लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली पर सख्ती दिखाते हुए ऐसे निर्देश जारी किए हैं, जिनसे आवंटियों को समय पर कब्जा और बुनियादी सुविधाएं दिलाने का रास्ता साफ होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी विकास प्राधिकरण को आवंटन के बाद लोगों को अनिश्चितता में रखकर सालों तक चक्कर नहीं कटवाने दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश के आवास विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के LDA, KDA, GDA समेत सभी विकास प्राधिकरणों को लॉटरी या आवंटन प्रक्रिया पूरी होते ही यह लिखित रूप से बताना होगा कि संबंधित आवंटी को फ्लैट या भूखंड का भौतिक कब्जा कितने समय के भीतर सौंपा जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश में आवासीय योजनाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

कब्जा टालने की प्रवृत्ति पर यूपी सरकार सख्त

उत्तर प्रदेश सरकार की समीक्षा में यह सामने आया कि प्रदेश की कई आवासीय योजनाओं में आवंटियों से पैसा लेने के बाद भी उन्हें लंबे समय तक कब्जा नहीं दिया जाता। कई मामलों में लोग वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में विवादों और प्रशासनिक ढिलाई के कारण पूरी प्रक्रिया ही अटक जाती है। अब यूपी सरकार ने इस व्यवस्था को बदलने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत यदि उत्तर प्रदेश के किसी भी विकास प्राधिकरण की ओर से कब्जा देने में देरी होती है, तो उसे उसका साफ, ठोस और लिखित कारण बताना होगा। केवल औपचारिक जवाब देकर मामला टालना अब आसान नहीं होगा। शासन ने संकेत दिए हैं कि बिना उचित कारण देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

लॉटरी के बाद ही बतानी होगी पूरी समयसीमा

उत्तर प्रदेश में अब आवंटन की लॉटरी निकलते ही आवंटियों को यह जानकारी देना अनिवार्य होगा कि कब्जा कब तक मिलेगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि फ्लैट या प्लॉट लेने वाले परिवार पहले दिन से ही अपनी योजना, वित्तीय तैयारी और शिफ्टिंग का निर्णय बेहतर ढंग से कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि आवंटियों को केवल कागजी आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध प्रक्रिया मिले। इसके साथ ही यूपी सरकार ने यह भी तय किया है कि लॉटरी के बाद रिक्त बचे फ्लैटों और भूखंडों की रीयल-टाइम जानकारी शासन को भेजी जाए। इससे उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखना आसान होगा और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कई विकास प्राधिकरण सड़क, नाली, पार्क, स्ट्रीट लाइट और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के नाम पर आवंटियों से पूरा पैसा तो वसूल लेते हैं, लेकिन मौके पर सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं होतीं। इससे लोगों को आर्थिक बोझ के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है। अब योगी सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण आवंटियों से जिस सुविधा के लिए शुल्क लें, उसे तय समयसीमा में उपलब्ध भी कराएं। यदि किसी परियोजना में बुनियादी सुविधाएं देने में लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला उत्तर प्रदेश के उन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए खास मायने रखता है, जो अपनी जीवनभर की कमाई घर के सपने में लगाते हैं।

पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए लगेंगे विशेष कैंप

उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल नई योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि पुरानी शिकायतों पर भी ध्यान दिया है। कब्जे में देरी, ब्याज की गलत गणना, विवादित संपत्तियों, अधूरी प्रक्रियाओं और लंबित फाइलों जैसे मामलों के समाधान के लिए विकास प्राधिकरणों को विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। जरूरत के मुताबिक उत्तर प्रदेश में विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि आवंटियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और एक ही स्थान पर उनकी शिकायतों का निस्तारण हो सके। सरकार का मानना है कि जब उत्तर प्रदेश का आम नागरिक अपनी मेहनत की पूंजी घर या प्लॉट खरीदने में लगाता है, तो उसे अपमान, देरी और भ्रम नहीं, बल्कि सम्मानजनक और समयबद्ध सेवा मिलनी चाहिए।

लाखों परिवारों को मिलेगी राहत

उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरणों को यह भी निर्देश दिया है कि रजिस्ट्री की व्यवस्था को कब्जे की समयसीमा से जोड़ा जाए। इसका उद्देश्य यह है कि लोग कानूनी अड़चनों, अधूरी औपचारिकताओं और फाइलों की देरी के कारण अपने घर में प्रवेश करने से वंचित न रह जाएं। इससे उत्तर प्रदेश में आवासीय योजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और लोगों का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी मजबूत होगा। योगी सरकार का यह फैसला उत्तर प्रदेश के लाखों फ्लैट और प्लॉट खरीदारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए, जो वर्षों की बचत और कर्ज के सहारे घर खरीदते हैं, यह व्यवस्था बड़ी राहत लेकर आ सकती है। उत्तर प्रदेश में अब आवासीय योजनाओं को केवल कागजी वादों तक सीमित रखने के बजाय समयबद्ध, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- ममता का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पश्चिम बंगाल की सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत दिखाई देता है और यह लगातार संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर कर रहा है।

keshav (2)
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 06:19 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पश्चिम बंगाल की सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत दिखाई देता है और यह लगातार संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर कर रहा है। प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार का रवैया निरंकुश और अव्यवस्थित होता जा रहा है। उनके मुताबिक, घुसपैठियों को संरक्षण देने के आरोपों के बीच अब यह सरकार संविधान और संस्थाओं के प्रति भी सम्मान नहीं दिखा रही है।

राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर

मौर्य ने हाल ही में द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यक्रम से दूरी बनाना और अपेक्षित सम्मान न देना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने इसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति असम्मान बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है। उन्होंने हाल ही में हुए हेलीकॉप्टर हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि मां शीतला, महाकाल की कृपा और समर्थकों की दुआओं की वजह से वह सुरक्षित बच पाए। एयरपोर्ट पहुंचने पर भाजपा कार्यकतार्ओं ने उनका स्वागत किया।

यह कदम आदिवासी समाज की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाला

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के प्रति असम्मान देखने को मिला और अब आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति के प्रति ऐसा व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह कदम आदिवासी समाज की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। इस दौरान डिप्टी सीएम ने होली के अवसर पर कार्यकतार्ओं को शुभकामनाएं भी दीं।  UP News



संबंधित खबरें