उत्तर प्रदेश में नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ बुनियादी शिक्षा को और मजबूती देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया।

UP News : उत्तर प्रदेश में नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ बुनियादी शिक्षा को और मजबूती देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शैक्षिक नवाचार और उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के जरिए साफ संदेश दिया गया कि उत्तर प्रदेश में हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना और उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक पल वह रहा जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं बच्चों के बीच पहुंचे और अलग-अलग कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को पाठ्यपुस्तकें तथा शैक्षणिक सामग्री वितरित की। कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के चयनित बच्चों को अपने हाथों से सामग्री देकर उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह, आत्मीयता और नई उम्मीद का माहौल देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर को इस कार्यक्रम ने एक बार फिर सामने रखा। मुख्यमंत्री ने केवल अभियान की शुरुआत ही नहीं की, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में बेहतर काम करने वाले विद्यालयों और विद्यार्थियों को भी मंच से सम्मानित किया। जनपद के पांच निपुण विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही पांच निपुण विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह सम्मान उत्तर प्रदेश की उस नई शिक्षा व्यवस्था का प्रतीक बना, जिसमें केवल नामांकन ही नहीं, बल्कि सीखने की गुणवत्ता और उपलब्धियों पर भी बराबर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने अभियान के उद्देश्य को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के हर बच्चे को विद्यालय से जोड़ना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। उनका कहना था कि शिक्षा केवल स्कूल पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य को मजबूत आधार देने का सबसे प्रभावी रास्ता है। इसलिए जरूरी है कि समाज का हर वर्ग इस प्रयास का हिस्सा बने। संदीप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते वर्षों में परिषदीय बेसिक शिक्षा विद्यालयों में व्यापक सुधार किए हैं। स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, बच्चों के बैठने, पढ़ने और सीखने का वातावरण सुधरा है। इसके साथ ही ड्रॉपआउट दर कम करने और नामांकन बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हुआ है। उन्होंने यह संकेत दिया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अब केवल ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका केंद्र बच्चों का सर्वांगीण विकास है।
राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश, निपुण भारत अभियान के तहत अग्रणी प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है। इसका मतलब है कि बुनियादी साक्षरता और गणनात्मक क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों को जमीन पर असरदार तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चों की सीखने की क्षमता को इतना मजबूत बनाया जाए कि आगे की पढ़ाई उनके लिए आसान और प्रभावी बन सके। कार्यक्रम में बालिका शिक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 8 से बढ़ाकर कक्षा 12 तक ले जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा जिन ब्लॉकों में अब तक ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां नए विद्यालय स्थापित करने की तैयारी है। यह कदम उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां बेटियों की पढ़ाई अक्सर माध्यमिक स्तर के बाद रुक जाती है।
सरकार ने प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसी क्रम में बाल वाटिका की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है, जहां 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाएगी। माना जा रहा है कि अगर बच्चे की बुनियाद मजबूत होगी, तो आगे की औपचारिक शिक्षा भी अधिक प्रभावशाली होगी। उत्तर प्रदेश की नई शिक्षा नीति में यह पहल शुरुआती सीखने के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
संदीप सिंह ने कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ को केवल सरकारी कार्यक्रम मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के जागरूक वर्गों को भी आगे आना होगा। उन्होंने अपील की कि हर गांव, हर मोहल्ले और हर बस्ती में यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रह जाए। उत्तर प्रदेश में शिक्षा का दायरा तभी बढ़ेगा, जब इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
राज्य मंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि अब ध्यान केवल परीक्षा कराने पर नहीं, बल्कि नकलविहीन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर है। उनका कहना था कि बच्चों का भविष्य मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और गुणवत्ता एक साथ दिखाई दे। उत्तर प्रदेश सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अवसर और मजबूत शैक्षिक आधार मिल सके। UP News