उत्तर प्रदेश के भाजपा (BJP) नेता राघवेंद्र प्रताप सिंह के मुस्लिम लड़कियों को लेकर विवादित बयान ने सियासी हलचल मचा दी है। इस पर उत्तर प्रदेश बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश की हलचल के बारे की जानकारी हम आपको विस्तार के साथ बता रहे हैं। UP News
बता दे कि मायावती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि "मुस्लिम लड़की लाओ, नौकरी पाओ के ताज़ा संकीर्ण व घृणित बयान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में धर्म परिवर्तन, लव जिहाद, और अन्य नफरती गतिविधियों को बढ़ावा देने का यह खेल अति-निन्दनीय है। ऐसे आपराधिक, अराजक और असामाजिक तत्वों को शह देने के बजाय सरकारों को इनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।"
यह विवाद 16 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में आयोजित एक जनसभा के दौरान शुरू हुआ, जब उत्तर प्रदेश भाजपा (BJP) के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने एक अत्यंत विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने मंच से कहा, "अगर मुस्लिम लड़के दो हिंदू लड़कियों को ले जाते हैं और मुस्लिम बनाते हैं, तो हम दस मुस्लिम लड़कियां लाकर देंगे। शादी का पूरा खर्चा हम उठाएंगे और सुरक्षा की गारंटी भी देंगे।" राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आगे कहा, "यह अखिलेश यादव का जमाना नहीं है, जो मुस्लिम तुष्टिकरण करते थे। अब योगी जी का समय है, डरने की कोई जरूरत नहीं है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो मुस्लिम लड़कियां "हमारे पास" आई हैं, उसका बदला कुछ भारी होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बवाल
भाजपा (BJP) नेता का यह बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो को लेकर विरोधी दल भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस ने भी इस बयान को शर्मनाक बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी का यह कदम युवाओं को भटकाने वाली राजनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "यह बयान समाज में नफरत और असहमति फैलाने के लिए है। भाजपा ने हमेशा से इस तरह की सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है।"
मायावती ने बयान को लेकर भाजपा को आड़े हाथों लिया और कहा कि यह बयान सिर्फ समाज में तनाव और अशांति पैदा करने का काम करता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस तरह के बयान देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। "ऐसे बयान देने वाले लोगों को कोई न कोई सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में शांति बनी रहे और लोगों के बीच धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव न हो," मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा।
सियासी हलचल जारी
भाजपा (BJP) नेता का यह बयान अब सियासी रंग ले चुका है। एक ओर जहां बीजेपी ने इस विवाद पर चुप्पी साधी है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां लगातार बीजेपी पर हमला बोल रही हैं। इस बीच, राघवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने बयान पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके बयान से जुड़े विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह घटना एक बार फिर से सियासी और सांप्रदायिक तनाव के मुद्दे को उठाती है। चाहे वह मायावती की तीखी प्रतिक्रिया हो, या कांग्रेस और अन्य दलों का विरोध, यह बयान भारतीय राजनीति में धर्म और जाति के मुद्दों को लेकर एक नई बहस का कारण बन चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य और केंद्र सरकार इस पर कोई ठोस कदम उठाती है या यह मामला यूं ही सियासी बयानबाजी का हिस्सा बनकर रह जाता है।