उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल छात्र का पुलिस ने हाथ तोड़ा, अब कैसे देगा परीक्षा
आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां हाईस्कूल के एक छात्र ने पुलिस पर मारपीट और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। आरोप है कि मिढ़ाकुर चौकी में तैनात दो दारोगाओं ने पूछताछ के नाम पर छात्र को प्रताड़ित किया, जिससे उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां हाईस्कूल के एक छात्र ने पुलिस पर मारपीट और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। आरोप है कि मिढ़ाकुर चौकी में तैनात दो दारोगाओं ने पूछताछ के नाम पर छात्र को प्रताड़ित किया, जिससे उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब छात्र की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, जिसके कारण उसका शैक्षणिक भविष्य दांव पर लग गया है।
मामूली विवाद से शुरू हुआ घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि 18 फरवरी को दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। परिजनों के अनुसार, शुरुआती तनाव के बाद दोनों पक्षों ने आपस में बातचीत कर मामला शांत कर लिया था। लेकिन कुछ समय बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए एक पक्ष के छात्र को चौकी बुलाया। परिवार का कहना है कि उन्हें लगा था कि केवल औपचारिक पूछताछ होगी और मामला समाप्त हो जाएगा।
पूछताछ के दौरान कथित मारपीट
पीड़ित छात्र का आरोप है कि चौकी पहुंचने के बाद उससे पैसों की मांग की गई। जब उसने रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उसके साथ सख्ती की गई। छात्र का दावा है कि उसे डंडों से पीटा गया, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई। घटना के बाद जब वह घर पहुंचा तो दर्द और सूजन बढ़ने लगी। परिजनों ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाकर उपचार कराया।
मेडिकल जांच में फ्रैक्चर की पुष्टि
अस्पताल में हुई जांच में छात्र के हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने उसे आराम की सलाह दी है और फिलहाल वह लिखने की स्थिति में नहीं है। चूंकि उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाएं जारी हैं, ऐसे में छात्र का अगला पेपर देना मुश्किल हो सकता है। परिवार का कहना है कि बच्चा मानसिक रूप से भी काफी आहत है और परीक्षा को लेकर चिंता में है। छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना पैसों की मांग से जुड़ी है। उनका कहना है कि यदि रुपये दे दिए जाते, तो शायद इतनी सख्ती न होती। परिवार ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान, दो दारोगा निलंबित
मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर दोनों आरोपित दारोगाओं को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छात्र की परीक्षा और भविष्य पर सवाल
सबसे बड़ी चिंता छात्र की शिक्षा को लेकर है। हाईस्कूल की परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। हाथ में फ्रैक्चर के कारण वह लिखने में असमर्थ है, जिससे उसके परिणाम और भविष्य पर असर पड़ सकता है। परिजन अब परीक्षा बोर्ड से विशेष व्यवस्था की मांग करने पर विचार कर रहे हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संवेदनशील मामलों में कानून व्यवस्था संभालने वालों की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई मेडिकल रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।
UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां हाईस्कूल के एक छात्र ने पुलिस पर मारपीट और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। आरोप है कि मिढ़ाकुर चौकी में तैनात दो दारोगाओं ने पूछताछ के नाम पर छात्र को प्रताड़ित किया, जिससे उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब छात्र की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, जिसके कारण उसका शैक्षणिक भविष्य दांव पर लग गया है।
मामूली विवाद से शुरू हुआ घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि 18 फरवरी को दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। परिजनों के अनुसार, शुरुआती तनाव के बाद दोनों पक्षों ने आपस में बातचीत कर मामला शांत कर लिया था। लेकिन कुछ समय बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए एक पक्ष के छात्र को चौकी बुलाया। परिवार का कहना है कि उन्हें लगा था कि केवल औपचारिक पूछताछ होगी और मामला समाप्त हो जाएगा।
पूछताछ के दौरान कथित मारपीट
पीड़ित छात्र का आरोप है कि चौकी पहुंचने के बाद उससे पैसों की मांग की गई। जब उसने रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उसके साथ सख्ती की गई। छात्र का दावा है कि उसे डंडों से पीटा गया, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई। घटना के बाद जब वह घर पहुंचा तो दर्द और सूजन बढ़ने लगी। परिजनों ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाकर उपचार कराया।
मेडिकल जांच में फ्रैक्चर की पुष्टि
अस्पताल में हुई जांच में छात्र के हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने उसे आराम की सलाह दी है और फिलहाल वह लिखने की स्थिति में नहीं है। चूंकि उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाएं जारी हैं, ऐसे में छात्र का अगला पेपर देना मुश्किल हो सकता है। परिवार का कहना है कि बच्चा मानसिक रूप से भी काफी आहत है और परीक्षा को लेकर चिंता में है। छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना पैसों की मांग से जुड़ी है। उनका कहना है कि यदि रुपये दे दिए जाते, तो शायद इतनी सख्ती न होती। परिवार ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान, दो दारोगा निलंबित
मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर दोनों आरोपित दारोगाओं को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छात्र की परीक्षा और भविष्य पर सवाल
सबसे बड़ी चिंता छात्र की शिक्षा को लेकर है। हाईस्कूल की परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। हाथ में फ्रैक्चर के कारण वह लिखने में असमर्थ है, जिससे उसके परिणाम और भविष्य पर असर पड़ सकता है। परिजन अब परीक्षा बोर्ड से विशेष व्यवस्था की मांग करने पर विचार कर रहे हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संवेदनशील मामलों में कानून व्यवस्था संभालने वालों की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई मेडिकल रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।












