
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में है । दिसंबर 2025 तक इस ऐतिहासिक मंदिर के पूर्ण होने की उम्मीद है। लेकिन यह सिर्फ आस्था और भक्ति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि अब यह शिक्षा और शोध का भी हिस्सा बनेगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि मंदिर निर्माण की तकनीकी जानकारियां और रिकॉर्डिंग IIT रुड़की को दी जाएंगी, ताकि देशभर के इंजीनियरिंग छात्र और शोधकर्ता इस अद्वितीय निर्माण की बारीकियों का अकादमिक अध्ययन कर सकें। भूमि पूजन से लेकर शिलान्यास और फिर पूरे परिसर के निर्माण तक की हर परत को अब आने वाली पीढ़ियाँ एक ‘लिविंग टेक्स्टबुक’ की तरह पढ़ और समझ सकेंगी। Uttar Pradesh Samachar
उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी में बन रहा राम मंदिर अब केवल भक्ति का प्रतीक नहीं रहेगा, बल्कि इंजीनियरिंग शिक्षा का भी हिस्सा बनेगा। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि IIT रुड़की और CBRI के साथ समझौते की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके ज़रिए छात्र और इंजीनियर न सिर्फ मंदिर निर्माण की तकनीकी बारीकियों को समझेंगे, बल्कि इसे आधुनिक इंजीनियरिंग और पारंपरिक शिल्पकला के अनोखे संगम के तौर पर भी पढ़ाया जाएगा।
मंदिर परिसर में पाँच विशेष टाइम-लैप्स कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें निर्माण की शुरुआत से अब तक का हर चरण रिकॉर्ड हो रहा है। यह पूरा डेटा ट्रस्ट की बौद्धिक संपदा रहेगा और भविष्य में IIT रुड़की इसे शैक्षिक और प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करेगा। ट्रस्ट इस रिकॉर्डिंग के आधार पर पाँच साल की एक डॉक्यूमेंट्री बनाने पर भी विचार कर रहा है, जिसमें खुदाई, सॉइल टेस्ट, डिजाइन बदलाव और निर्माण की प्रगति को विस्तार से दिखाया जाएगा।
मंदिर के लोअर प्लिंथ पर 90 म्यूरल्स लगाए जाने हैं, जिनमें से 85 पहले ही तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा मंदिर की भव्यता बढ़ाने के लिए 3D मूर्तियां और अत्याधुनिक फसाड लाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा। तीन कंपनियों से इसके प्रस्ताव मंगाए गए हैं, जिन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मिश्र ने बताया कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और उम्मीद है कि अक्टूबर 2025 तक अधिकांश काम पूरा हो जाएगा। दिसंबर 2025 तक मंदिर पूरी तरह तैयार होकर श्रद्धालुओं और देश-दुनिया के सामने अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा होगा। Uttar Pradesh Samachar