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प्रदेश के जौनपुर जिले में कथित गांजा बरामदगी के एक मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में कथित गांजा बरामदगी के एक मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने पुलिस की ओर से पेश किए गए तथ्यों और आरोपी पक्ष की दलीलों का अवलोकन करने के बाद गिरफ्तारी को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना और आरोपी को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जांच कर निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इस फैसले के बाद मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है और पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
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मामला सरपतहां थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। पुलिस का दावा था कि उसे सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए एक स्थान से चार किलो से अधिक गांजा बरामद किया गया। इसी बरामदगी के आधार पर एक युवक को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, आरोपी पक्ष का कहना है कि जिस स्थान से बरामदगी दिखाई गई, वह जगह उनके नियमित उपयोग में नहीं थी और वहां रखी बोरी से उनका कोई संबंध नहीं था।
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परिजनों का आरोप है कि पुलिस बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के सीधे युवक को अपने साथ ले गई। उनका कहना है कि जब उन्होंने बरामदगी को लेकर सवाल उठाए तो उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिवार का दावा है कि पुलिस की पूरी कार्रवाई के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जो बाद में अदालत में भी चर्चा का विषय बने। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई।
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जब आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया तो उसकी ओर से कुछ वीडियो और अन्य सामग्री अदालत के सामने रखी गई। आरोपी पक्ष ने दावा किया कि इन वीडियो में पुलिस कार्रवाई के दौरान की परिस्थितियां दिखाई गई हैं। न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों, गिरफ्तारी से जुड़े रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग स्वीकार नहीं की। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों और रिकॉर्ड के आधार पर कई बिंदुओं पर स्पष्टता आवश्यक है। इसी के चलते अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
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अदालत ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए जौनपुर के पुलिस अधीक्षक से पूछा है कि मामले में क्या कार्रवाई की गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया किस आधार पर अपनाई गई। इसके लिए 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। अब सभी की नजरें पुलिस विभाग की आंतरिक जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। इस मामले के बाद जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छिड़ गई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और कानूनी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद मामले की जांच जारी है और पुलिस विभाग से रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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