संभल में एक निजी परिसर में नमाज अदा करने को लेकर विवाद सामने आया था। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित कर दी थी, जिसे याचिकाकर्ता ने चुनौती दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 1995 से चली आ रही परंपरा को बरकरार रखा जाए।

UP News : उत्तर प्रदेश के संभल में एक निजी परिसर में नमाज अदा करने को लेकर विवाद सामने आया था। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित कर दी थी, जिसे याचिकाकर्ता ने चुनौती दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 1995 से चली आ रही परंपरा को बरकरार रखा जाए। किसी भी नागरिक को उसके निजी परिसर में धार्मिक गतिविधि करने से रोका नहीं जा सकता। संबंधित ढांचे को मौजूदा स्थिति में मस्जिद का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने यह भी माना कि उस स्थान का उपयोग पहले से नमाज अदा करने के लिए होता रहा है। इसलिए वहां नमाज पढ़ने पर पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अधिकारी जिले में कानून का प्रभावी पालन नहीं करा सकते, तो उन्हें पद छोड़ने या स्थानांतरण पर विचार करना चाहिए।
राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि वह नागरिकों के धार्मिक अधिकारों में दखल नहीं देती। किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अदालत ने भारत की पहचान को उसकी विविधता से जोड़ते हुए कहा कि यह देश अपनी अलग-अलग संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं के सह-अस्तित्व के कारण विशिष्ट है। इस फैसले से दो बातें साफ होती हैं। व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है साथ ही प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखे।