बाराबंकी के गोवध मामले में अदालत ने सुहेल को चार साल की कठोर कैद और तीन लाख रुपये जुर्माने की सजा क्यों सुनाई? करीब 300 किलोग्राम गोवंशीय मांस की बरामदगी से जुड़े इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को दोषमुक्त क्यों किया गया?

UP News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में वर्ष 2020 के गोवध से जुड़े एक मामले में अदालत ने दोषी सुहेल को चार साल के कठोर कारावास और तीन लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-09, बाराबंकी की अदालत ने सुनाया। मामले में छह लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन सुनवाई के बाद अदालत ने अन्य पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त 2020 को थाना जहांगीराबाद में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अक्षय कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला गोवंशीय पशु के करीब 300 किलोग्राम मांस की बरामदगी से संबंधित था। इस संबंध में मुकदमा अपराध संख्या 196/2020 के तहत उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5/8 में कार्रवाई की गई थी। इस मामले में ग्राम भयारा निवासी सुहेल पुत्र हनीफ समेत छह लोगों को नामजद किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सुहेल को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और तीन लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। UP News :
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मामले में नामजद इकरार, इकराम, मुशर्रफ, गाजी हसन और साजिद को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। इस तरह एक ही मामले में एक अभियुक्त को सजा मिली, जबकि अन्य पांच आरोपियों को न्यायालय से राहत मिली।
बाराबंकी पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी के निर्देशन में ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत मामलों में प्रभावी पैरवी पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान मॉनीटरिंग सेल, माफिया सेल और थाना जहांगीराबाद के पैरोकार ने साक्ष्यों और गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने में सहयोग किया। मामले में एडीजीसी वरुण मिश्रा, मॉनीटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव, माफिया सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रामवीर सिंह, मुख्य आरक्षी इंद्रेश मिश्रा, आरक्षी महेंद्र कुमार, महिला आरक्षी शिवानी, थाना जहांगीराबाद के पैरोकार मुख्य आरक्षी जय किशन और कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी सतीश कुमार की भूमिका बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य दर्ज आपराधिक मामलों में प्रभावी विवेचना और अभियोजन के जरिए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाना है। इस मामले में अदालत का फैसला पुलिस और अभियोजन की पैरवी के बाद आया है। UP News :
विज्ञापन