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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आया एक हैरान करने वाला मामला अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामूली वेतन पाने वाला एक चपरासी कैसे करोड़ों रुपये के नेटवर्क का हिस्सा बन गया यह सवाल अब जांच एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आया एक हैरान करने वाला मामला अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामूली वेतन पाने वाला एक चपरासी कैसे करोड़ों रुपये के नेटवर्क का हिस्सा बन गया यह सवाल अब जांच एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। शुरुआती जांच में ही सामने आए बैंक खातों, भारी रकम और परिजनों के नाम पर की गई एफडी ने यह संकेत दे दिया है कि यह सिर्फ गबन नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है। UP News
पूरा मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से जुड़ा है, जहां तैनात एक कर्मचारी पर सरकारी धन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने वेतन मद से जुड़े भुगतान में हेरफेर कर बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, संदिग्ध लेनदेन का दायरा भी बढ़ता गया और अब तक 53 बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की पुष्टि हो चुकी है। इन खातों में करीब 5.28 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज की जा चुकी है। UP News
जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह भी सामने आया कि आरोपी ने रकम को छिपाने के लिए अपने पारिवारिक संबंधों का सहारा लिया। दो पत्नियों के खातों में क्रमशः करीब 33.30 लाख और 25 लाख रुपये की एफडी कराई गई, जबकि एक अन्य महिला रिश्तेदार के खाते में भी रकम जमा होने के संकेत मिले हैं। इससे यह साफ हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से कई स्तरों पर फैलाया गया था। UP News
मामला केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं रहा। जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी धन का एक हिस्सा बिल्डर कंपनियों तक पहुंचाया गया। करीब 90 लाख रुपये एक कंपनी और 17 लाख से अधिक दूसरी कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए। इन लेनदेन को लेकर संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें रकम में किसी तरह की छेड़छाड़ न करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब डीआईओएस कार्यालय की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया कि सितंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच करीब 98 ट्रांजेक्शन के जरिए 1.02 करोड़ रुपये कोषागार से निकाले गए थे। हालांकि बाद की जांच में यह राशि और भी अधिक होने के संकेत मिले, जिससे उत्तर प्रदेश में इस घोटाले की गंभीरता और बढ़ गई। UP News
इस मामले में एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिसे बाद में जमानत मिल गई। वहीं मुख्य आरोपी को भी अग्रिम जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस ने जांच का दायरा सीमित नहीं रखा है। वर्ष 2014 से 2026 तक के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और जिले के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों के कर्मचारियों का पूरा डेटा जांच के दायरे में लाया गया है। एसपी के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय टीम इस पूरे मामले की रोजाना मॉनिटरिंग कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इससे जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। UP News
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